Saturday, April 25

तमिलनाडु चुनाव से पहले कमल हासन की चेतावनी: बिहार का उदाहरण देकर क्यों उठाया SIR का मुद्दा?

पटना/चेन्नई। तमिलनाडु में इस साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले मक्कल निधि मय्यम (MNM) पार्टी के संस्थापक और प्रसिद्ध अभिनेता कमल हासन ने चुनाव आयोग पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने SIR (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) प्रक्रिया को लेकर चिंता जाहिर करते हुए कहा कि यह लोकतंत्र के सबसे बड़े अधिकार—मतदान के अधिकार—पर ही सवाल खड़ा कर रही है।

This slideshow requires JavaScript.

कमल हासन ने संसद के संयुक्त सत्र में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव के दौरान यह मुद्दा उठाया। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि वोट देने के अधिकार को ही जांच के दायरे में लाना चिंताजनक है और यह एक खतरनाक संकेत है।

SIR को लेकर क्यों चिंतित हैं कमल हासन?

कमल हासन ने कहा कि मतदाता सूची के सत्यापन (SIR) के नाम पर आम लोगों को परेशान किया जा रहा है। कई मतदाताओं को नाम की वर्तनी, पता या अन्य छोटी-छोटी त्रुटियों के कारण जांच का सामना करना पड़ रहा है।

उन्होंने आरोप लगाया कि इन मामूली गलतियों को अयोग्यता का आधार बनाया जा रहा है, जिससे मतदाता सूची से नाम हटाए जा रहे हैं।

कमल हासन ने कहा—
“हम वोट डालना चाहते हैं, लेकिन आयोग हमारे वोट देने के अधिकार की जांच कर रहा है।”

बिहार का जिक्र कर क्यों उठाया मुद्दा?

कमल हासन ने SIR के खतरे को समझाने के लिए बिहार का उदाहरण दिया। उन्होंने मीडिया रिपोर्ट्स का हवाला देते हुए दावा किया कि बिहार में SIR प्रक्रिया के दौरान कई ऐसे मतदाताओं के नाम काट दिए गए, जो जीवित थे, लेकिन उन्हें रिकॉर्ड में मृत घोषित कर दिया गया।

उन्होंने तीखा हमला करते हुए कहा कि बिहार अब “जिंदा मुर्दों की भूमि” बनता जा रहा है और तमिलनाडु ऐसा नहीं बनने देगा।

कमल हासन ने कहा—
“हम नहीं चाहते कि यह बीमारी पूरे देश में फैले।”

उनका कहना था कि चुनाव आयोग की भूमिका लोकतंत्र को मजबूत करने की होनी चाहिए, लेकिन SIR जैसी प्रक्रिया से जनता का भरोसा कमजोर हो रहा है।

चुनाव आयोग पर अविश्वास, बोले- ‘स्पेल चेक कहानी’

कमल हासन ने चुनाव आयोग पर अविश्वास जताते हुए SIR को “जीवित मृतकों की स्पेल चेक कहानी” बताया। उन्होंने कहा कि छोटे-छोटे दस्तावेजी या तकनीकी कारणों से लोगों को मतदाता सूची से बाहर किया जा रहा है।

उन्होंने आशंका जताई कि अगर यही स्थिति रही तो तमिलनाडु में भी जल्द ही कागजों पर लगभग एक करोड़ लोग ‘जिंदा होकर भी मृत’ घोषित हो सकते हैं।

राजनीतिक चेतावनी भी दी

कमल हासन ने इस मुद्दे को केवल प्रशासनिक समस्या नहीं बताया, बल्कि इसे लोकतंत्र पर सीधा हमला करार दिया। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि आयोग जनता की मदद करने से इनकार करता है, तो इससे चुनावी प्रक्रिया की वैधता पर सवाल खड़े होंगे।

उन्होंने यहां तक कह दिया कि ऐसी स्थिति में चुनावी जीत को “आधी-अधूरी, अधपकी और अवैध” कहा जाएगा।

तमिलनाडु चुनाव से पहले बड़ा राजनीतिक संदेश

विशेषज्ञों के मुताबिक कमल हासन का यह बयान तमिलनाडु चुनाव से पहले एक बड़ा राजनीतिक संकेत है। उन्होंने यह मुद्दा उठाकर चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल खड़े किए हैं और जनता को यह संदेश दिया है कि मतदाता सूची की प्रक्रिया को लेकर सतर्क रहने की जरूरत है।

कमल हासन ने यह मांग भी की कि जिन लोगों के नाम गलत तरीके से काटे गए हैं, उन्हें दोबारा मतदान का अधिकार तुरंत लौटाया जाए।

निष्कर्ष

तमिलनाडु चुनाव से पहले कमल हासन ने बिहार का उदाहरण देकर SIR प्रक्रिया को लेकर जो चिंता जताई है, वह केवल एक राज्य तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे देश में मतदाता अधिकारों की सुरक्षा का सवाल बनता जा रहा है। अब देखना होगा कि चुनाव आयोग इस पर क्या प्रतिक्रिया देता है और क्या मतदाता सूची से जुड़े विवाद आने वाले चुनावों में बड़ा मुद्दा बनते हैं।

Leave a Reply