
पटना। बिहार में राजस्व विभाग और राज्य सरकार के बीच टकराव अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। प्रदेशभर में 1,000 से अधिक सर्किल ऑफिसर (CO) और राजस्व अधिकारी (RO) बीते 2 फरवरी से हड़ताल पर हैं। अधिकारियों की नाराजगी का कारण राज्य सरकार द्वारा उप-मंडल स्तर पर नए कैडर (SRO) का गठन करना है, जिससे उन्हें अब डिप्टी कलेक्टर (भूमि सुधार) यानी DCLR जैसे महत्वपूर्ण पद पर पदोन्नति से वंचित होना पड़ेगा।
सरकार ने भी कड़ा रुख अपनाते हुए हड़ताली अधिकारियों को सरकारी वाहन और लैपटॉप लौटाने का आदेश दिया है। साथ ही स्पष्ट चेतावनी दी गई है कि ‘काम नहीं तो वेतन नहीं’ की नीति के तहत अनुपस्थित दिनों का वेतन रोक दिया जाएगा।
क्या है पूरा विवाद?
राज्य मंत्रिमंडल ने 29 जनवरी को उप-मंडल राजस्व अधिकारी (SRO) के नए पद के गठन को मंजूरी दी। यह पद मजिस्ट्रेट श्रेणी का नहीं है।
अब नए नियम के तहत, जो अधिकारी पहले राजस्व अधिकारी और फिर सर्किल अधिकारी बनता था, वह अब आगे जाकर SRO बन सकता है, लेकिन पहले की तरह DCLR (डिप्टी कलेक्टर भूमि सुधार) के पद पर पदोन्नति नहीं पा सकेगा।
इस बदलाव का सीधा असर बिहार राजस्व सेवा (BRS) के अधिकारियों पर पड़ा है, क्योंकि DCLR पद को अब बिहार प्रशासनिक सेवा (BAS) के अधिकारियों के लिए आरक्षित कर दिया गया है।
अधिकारियों का आरोप- मनोबल टूटेगा, बढ़ेगा भ्रष्टाचार
हड़ताल पर बैठे कई CO और RO का कहना है कि यदि सरकार ने फैसला वापस नहीं लिया तो इससे अधिकारियों का मनोबल गिर जाएगा और प्रशासनिक व्यवस्था पर नकारात्मक असर पड़ेगा।
अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि SRO को एक औपचारिक पद बनाकर रखा जा रहा है, जिसमें वास्तविक अधिकार नहीं होंगे। ऐसे में कोई भी अधिकारी SRO पद स्वीकार करने में रुचि नहीं लेगा।
भूमि सर्वेक्षण और डिजिटलीकरण पर असर
इस हड़ताल का असर राज्य में चल रहे भूमि सर्वेक्षण, भूमि अभिलेखों के डिजिटलीकरण और राजस्व कार्यों पर स्पष्ट रूप से दिखने लगा है।
बिहार में कुल 534 प्रखंड हैं और प्रत्येक प्रखंड में एक CO और एक RO की तैनाती होती है। हड़ताल के कारण आम जनता के जमीन संबंधी कार्य ठप पड़ने लगे हैं।
सरकार का सख्त कदम- गाड़ी लौटाओ, वेतन कटेगा
राज्य सरकार ने हड़ताल कर रहे अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया है कि वे सरकारी वाहन और लैपटॉप तत्काल लौटाएं।
सरकार ने दो टूक शब्दों में कहा है कि काम नहीं करने पर वेतन नहीं मिलेगा। इससे हड़ताली अधिकारियों में और नाराजगी बढ़ गई है।
तनाव की शुरुआत पहले से थी
राज्य सरकार और राजस्व अधिकारियों के बीच यह तनाव सिर्फ SRO कैडर के गठन से नहीं शुरू हुआ। दरअसल, ऑनलाइन भूमि सर्वेक्षण के दौरान उपमुख्यमंत्री और राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने सार्वजनिक शिकायतों की सुनवाई में कई CO को भ्रष्टाचार के आरोपों पर खुले मंच से फटकार लगाई थी।
इसके बाद से विभाग के भीतर असंतोष गहराता गया और SRO कैडर के गठन ने इस आग में घी डाल दिया।
संघ का ज्ञापन: ‘न्यायालय के आदेश का उल्लंघन’
बिहार राजस्व सेवा संघ (BRSA) के अध्यक्ष आनंद कुमार ने 1 फरवरी को विभाग के प्रधान सचिव सी.के. अनिल को ज्ञापन सौंपा।
उन्होंने लिखा कि संघ को उम्मीद थी कि सरकार न्यायिक आदेशों का सम्मान करेगी और पदोन्नति व्यवस्था में बदलाव नहीं करेगी। लेकिन इसके उलट मंत्रिमंडल ने SRO पद को मंजूरी दे दी, जिससे BRS अधिकारियों का मनोबल टूट गया।
अधिकारी बोले- 16-18 घंटे काम करते हैं, फिर भी न्याय नहीं
एक अंचल अधिकारी ने कहा कि यह सच है कि CO की छवि खराब हुई है और कुछ अधिकारी भ्रष्टाचार में लिप्त हो सकते हैं। लेकिन सच्चाई यह भी है कि भूमि अभिलेखों के डिजिटलीकरण जैसे बड़े कार्यों को संभालने के लिए CO रोजाना 16 से 18 घंटे काम करता है।
उन्होंने कहा कि वे कोई अतिरिक्त मांग नहीं कर रहे, केवल सेवा नियमों की रक्षा चाहते हैं।
अधिकारी ने सवाल उठाया कि अगर BAS अधिकारी एक साल में DCLR बन सकता है, तो 10-15 साल अनुभव रखने वाले BRS अधिकारी को यह पद क्यों नहीं मिलना चाहिए?
मंत्री विजय कुमार सिन्हा का बयान- ‘कड़ा सबक सिखाया है’
राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि सरकार ने पहले ही वादा किया था कि तीन सदस्यीय समिति सेवा संबंधी मामलों की जांच करेगी।
मंत्री ने नाराजगी जताते हुए कहा कि इसके बावजूद अधिकारी हड़ताल पर बने हुए हैं।
उन्होंने कहा,
“हमने उन्हें कड़ा सबक सिखाया है। भले ही यह कड़वा लगे, लेकिन इसका असर जरूर होगा।”
अब सवाल- कौन झुकेगा? सरकार या अधिकारी?
बिहार में यह विवाद अब केवल पदोन्नति का मामला नहीं रह गया है, बल्कि यह प्रशासनिक अधिकार, सेवा सम्मान और विभागीय भविष्य की लड़ाई बन चुका है।
सरकार जहां अनुशासन और कार्य बाधित होने को लेकर सख्त है, वहीं अधिकारी इसे अपने करियर और अधिकारों पर सीधा हमला मान रहे हैं।
अब देखना यह है कि सरकार अपने फैसले पर अडिग रहती है या राजस्व अधिकारी आंदोलन को और तेज कर सरकार को पीछे हटने पर मजबूर करते हैं।