
ढाका: बांग्लादेश इस महीने 12 फरवरी को आम चुनाव की ओर बढ़ रहा है। यह चुनाव पिछले दो दशकों के चुनावों से काफी अलग माना जा रहा है। इस बार अवामी लीग और शेख हसीना चुनाव मैदान से बाहर हैं, जबकि बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) और जमात-ए-इस्लामी (JIB) मुख्य भूमिका निभा रही हैं। इस चुनाव पर भारत, पाकिस्तान और चीन की भी गहरी नजर है।
ढाका के बदलते विदेश संबंध
इंडिपेंडेंट यूनिवर्सिटी बांग्लादेश के विशेषज्ञ खोंडाकर ताहमिद रेजवान के अनुसार, शेख हसीना के हटने के बाद ढाका की विदेश नीति बदल गई है। भारत के साथ द्विपक्षीय संबंध कमजोर हुए हैं, पाकिस्तान के साथ गर्मजोशी भरा मेल-मिलाप हुआ है, और चीन के साथ रणनीतिक रिश्ते और गहरे हुए हैं।
भारत के लिए चुनाव का महत्व
अटलांटिक काउंसिल के सीनियर फेलो माइकल कुगेलमैन कहते हैं कि भारत के लिए सबसे बड़ी चुनौती यह है कि नई सरकार भारत के साथ रिश्तों को नजरअंदाज न करे। BNP के साथ भारत सहज रहेगा क्योंकि यह पार्टी जमात के साथ गठबंधन में नहीं है और भारत के साथ जुड़ने की इच्छा जता चुकी है। भारत बीएनपी नेतृत्व वाली सरकार के साथ काम करने के लिए तैयार है और अवामी लीग के गैर-मौजूदगी में अपने हितों की सुरक्षा को लेकर सक्रिय रहेगा।
चीन-बांग्लादेश संबंध
बीजिंग पिछले सालों में ढाका के साथ आर्थिक और सैन्य संबंध बढ़ा रहा है। चीन का मकसद बांग्लादेश में राजनीतिक स्थिरता और निवेश सुरक्षा सुनिश्चित करना है। चीन का चुनाव में किसी विशेष पार्टी के प्रति स्पष्ट झुकाव नहीं है, लेकिन वह सत्ता में आने वाली सरकारों के साथ संपर्क बनाए रखेगा और भारत के प्रभाव को सीमित करने की कोशिश करेगा।
पाकिस्तान की नजर चुनाव पर
शेख हसीना के हटने के बाद पाकिस्तान और बांग्लादेश के रिश्ते बेहतर हुए हैं। पाकिस्तान मुख्य रूप से सैन्य और सांस्कृतिक कूटनीति के जरिए अपने प्रभाव को बढ़ाना चाहता है और भारत के पूर्वोत्तर में सुरक्षा हितों को चुनौती देना चाहता है। कुगेलमैन के अनुसार, पाकिस्तान जमात की जीत को प्राथमिकता देगा, जबकि BNP नेतृत्व वाली सरकार उसके लिए संतोषजनक रहेगी।
तीनों पड़ोसी देशों की रणनीति
भारत: बीएनपी सरकार के साथ रिश्तों को मजबूत कर क्षेत्रीय सुरक्षा सुनिश्चित करना चाहता है।
चीन: चुनाव परिणामों पर नजर रखे हुए ढाका में अपने निवेश और व्यापार हितों को सुरक्षित रखना चाहता है।
पाकिस्तान: ढाका के साथ अपनी रणनीतिक पकड़ बढ़ाकर भारत के प्रभाव को सीमित करना चाहता है।
विशेषज्ञ मानते हैं कि यह चुनाव सिर्फ बांग्लादेश नहीं, बल्कि पूरे दक्षिण एशिया के भू-राजनीतिक संतुलन को प्रभावित करेगा।