
वॉशिंगटन: अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच अरब सागर में अमेरिकी नौसेना के अत्याधुनिक F-35C स्टील्थ फाइटर जेट ने एक ईरानी ड्रोन को मार गिराया है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के प्रवक्ता कैप्टन टिम हॉकिन्स ने घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि यह कार्रवाई आत्मरक्षा के तहत की गई।
प्रवक्ता के अनुसार, ईरानी ड्रोन अमेरिकी एयरक्राफ्ट कैरियर USS अब्राहम लिंकन के करीब पहुंच रहा था, जिसके बाद वहां तैनात F-35C फाइटर जेट ने उसे हवा में ही नष्ट कर दिया।
मिडिल ईस्ट में तैनात है USS अब्राहम लिंकन
USS अब्राहम लिंकन को अमेरिका ने पश्चिम एशिया क्षेत्र में सुरक्षा स्थिति को देखते हुए तैनात किया हुआ है। इस कैरियर पर कैरियर एयर विंग-9 (CVW-9) मौजूद है, जिसमें कुल आठ स्क्वाड्रन शामिल हैं। इनमें F-35C, F/A-18E/F सुपर हॉर्नेट, EA-18G ग्राउलर, E-2D हॉकआई, CMV-22B ऑस्प्रे और MH-60R/S सीहॉक जैसे विमान और हेलीकॉप्टर शामिल हैं।
F-35C क्यों माना जाता है बेहद घातक?
F-35C को अमेरिका के ज्वाइंट स्ट्राइक फाइटर प्रोग्राम का सबसे उन्नत कैरियर-आधारित वर्जन माना जाता है। यह दुनिया का ऐसा फाइटर जेट है जिसे विशेष रूप से न्यूक्लियर सुपरकैरियर से कैटापल्ट लॉन्च और अरेस्टेड लैंडिंग के लिए डिजाइन किया गया है।
विशेषज्ञों के मुताबिक, इसकी सबसे बड़ी ताकत इसकी स्टील्थ तकनीक, लंबी रेंज और भारी हथियार क्षमता है।
F-35C की खासियतें
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यह F-35 परिवार का ऐसा वर्जन है जो एयरक्राफ्ट कैरियर ऑपरेशन के लिए बनाया गया है
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इसमें बड़े पंख, मजबूत लैंडिंग गियर और फोल्ड होने वाले विंगटिप्स हैं
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इसकी उड़ान रेंज लगभग 1200 नॉटिकल माइल बताई जाती है
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यह 5000 पाउंड से अधिक इंटरनल हथियार ले जा सकता है
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कुल मिलाकर यह 18,000 पाउंड तक हथियार (इंटरनल + एक्सटर्नल) ले जाने में सक्षम है
स्टील्थ के साथ निगरानी और हमला दोनों में सक्षम
F-35C सिर्फ हमला करने वाला फाइटर जेट नहीं है, बल्कि यह इंटेलिजेंस, सर्विलांस और रिकोनिसेंस (ISR) मिशन में भी बेहद कारगर माना जाता है। यह युद्ध क्षेत्र में मौजूद जमीन, समुद्र और हवा के अन्य नेटवर्क सिस्टम से जुड़कर सूचनाएं साझा कर सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि ईरानी ड्रोन को मार गिराने की घटना यह संकेत देती है कि अमेरिका पश्चिम एशिया में अपनी सैन्य तैनाती को लेकर किसी भी खतरे पर तुरंत कार्रवाई करने की रणनीति पर काम कर रहा है।