
मॉस्को/नई दिल्ली: भारत और रूस के बीच पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान Su-57 के लाइसेंस प्रोडक्शन को लेकर बातचीत काफी आगे बढ़ चुकी है। सूत्रों के मुताबिक, हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) के नासिक प्लांट में, जहां पहले ही 220 से अधिक Su-30MKI तैयार किए जा चुके हैं, उसी उत्पादन लाइन को अपग्रेड कर Su-57 निर्माण की संभावनाएं तलाशी जा रही हैं।
दिलचस्प बात यह है कि रूस ने इससे पहले भी भारत को इसी तरह का प्रस्ताव दिया था। वर्ष 2010 में जब भारत ने MMRCA (मीडियम मल्टी-रोल कॉम्बैट एयरक्राफ्ट) टेंडर निकाला था, तब रूस ने Su-35 फाइटर जेट के लाइसेंस प्रोडक्शन का ऑफर दिया था, जिसे भारत ने अस्वीकार कर दिया था।
MMRCA टेंडर में Su-35 की एंट्री थी खास
MMRCA टेंडर में दुनिया के छह उन्नत लड़ाकू विमान शामिल थे। इनमें अधिकांश विमान मीडियम वेट श्रेणी के थे, जबकि अमेरिकी F-16/-21 और स्वीडिश ग्रिपेन हल्के श्रेणी के माने जाते थे। ऐसे में Su-35 सबसे अधिक ताकतवर और भारी क्षमता वाला दावेदार था।
रूस ने दावा किया था कि Su-35 में ज्यादा पेलोड, अधिक रेंज, शक्तिशाली रडार और ऊंचाई पर उड़ान भरने की बेहतर क्षमता है। साथ ही इसमें थ्री-डायमेंशनल थ्रस्ट वेक्टरिंग इंजन लगाया गया था, जो इसे बेहद खतरनाक युद्धक क्षमता प्रदान करता है।
रूस ने भारत को 114 Su-35 बनाने का ऑफर दिया था
रूस ने भारत में 114 Su-35 लड़ाकू विमान बनाने की पेशकश भी की थी और इसे टेक्नोलॉजी ट्रांसफर से जोड़कर प्रस्ताव को और आकर्षक बनाया था। इससे भारतीय वायुसेना के मौजूदा Su-30MKI बेड़े को भी आधुनिक बनाने में मदद मिल सकती थी।
भारत ने Su-35 को क्यों किया था खारिज?
रूस के आकर्षक प्रस्ताव के बावजूद भारतीय वायुसेना ने Su-35 को अपनाने से इनकार कर दिया था। विशेषज्ञों के अनुसार, इसकी सबसे बड़ी वजह यह थी कि Su-35 आकार में काफी बड़ा था, जिससे इसका ऑपरेशन और मेंटेनेंस खर्च बढ़ने की आशंका थी।
इसके अलावा, वायुसेना के लिए एक बड़ा मुद्दा यह भी था कि Su-35 में उस समय प्राइमरी AESA रडार की कमी मानी गई, जबकि आधुनिक युद्ध में AESA रडार को बेहद महत्वपूर्ण तकनीक माना जाता है।
हालांकि विमान में सेकेंडरी L-बैंड AESA रडार मौजूद थे, लेकिन वायुसेना को यह उचित नहीं लगा कि Su-30MKI से केवल थोड़ी बेहतर क्षमता वाले एक नए फाइटर टाइप को बेड़े में शामिल किया जाए।
अब Su-57 पर उम्मीदें
अब भारत और रूस के बीच Su-57 को लेकर चर्चा तेज हो गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, Su-57 की लागत Su-35 से अधिक होने के बावजूद यह अन्य पांचवीं पीढ़ी के विमानों की तुलना में अपेक्षाकृत किफायती माना जा रहा है।
Su-57 के शामिल होने से भारतीय वायुसेना की ताकत में बड़ा इजाफा हो सकता है, खासतौर पर चीन और पाकिस्तान जैसे दो मोर्चों पर संभावित संघर्ष की स्थिति में।
विशेषज्ञों के अनुसार, यदि भारत के पास राफेल, Su-30MKI, तेजस और Su-57 जैसे लड़ाकू विमानों का मजबूत बेड़ा तैयार होता है, तो भारत की रणनीतिक क्षमता कई गुना बढ़ जाएगी।