
वॉशिंगटन/नई दिल्ली: भारत और अमेरिका के बीच हाल ही में हुए व्यापार समझौते से भारतीय रक्षा क्षेत्र को बड़ा लाभ मिलने की संभावना है। इस डील के तहत भारत को तेजस Mark1A फाइटर जेट के लिए जरूरी अमेरिकी इंजन और तकनीक के ट्रांसफर में मदद मिलेगी, जिससे रक्षा निर्माण और विकास प्रोजेक्टों में तेजी आएगी।
पिछले साल भारत और अमेरिका के संबंधों में खटास के कारण तेजस Mark1A जेट के लिए इंजन सप्लाई में देरी हुई थी। इससे अगली पीढ़ी के फाइटर जेट तेजस Mark2 की डिजाइन और उत्पादन पर भी असर पड़ा। हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) 500 जेट बनाने की योजना में अमेरिकी इंजन का इस्तेमाल कर रही है, और टेक्नोलॉजी ट्रांसफर का समय पर पूरा होना इस योजना के लिए महत्वपूर्ण है।
विशेषज्ञों के अनुसार, अमेरिका के जनरल इलेक्ट्रिक F-414 एयरो-इंजन के उत्पादन और तकनीक साझेदारी के लिए जून 2023 में सहमति जताई गई थी। इस डील से तेजस Mark2 के डिजाइन और पहली उड़ान में रफ्तार आएगी।
हालांकि, अमेरिकी तकनीक ट्रांसफर में मंजूरी का प्रक्रिया कुछ समय ले सकती है और यह अगले दशकों तक भारत-यूएस सैन्य तकनीक साझेदारी के लिए अहम दिशा तय करेगी। ट्रेड डील की घोषणा से पहले अमेरिका ने भारत के साथ रक्षा और सैन्य सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया था, और अब संबंधों में सुधार से रक्षा क्षेत्र के कई बड़े प्रोजेक्टों में तेजी आएगी