
नई दिल्ली: अमेरिका के साथ हाल ही में हुई ट्रेड डील को लेकर संसद में चल रहे हंगामे के बीच केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने स्पष्ट किया कि इस समझौते से भारतीय किसानों को कोई नुकसान नहीं होगा। उन्होंने कहा कि भारतीय डेयरी और कृषि उद्योग का पूरा ध्यान रखा गया है और यह डील छोटे और मझोले उद्योगों के लिए भी नए अवसर पैदा करेगी।
गोयल ने कहा कि लगभग एक साल की बातचीत के बाद अमेरिका के साथ यह एग्रीमेंट हुआ है। उन्होंने बताया, “दोनों पक्ष पिछले एक वर्ष में विभिन्न स्तर पर वार्ता करते रहे। इन वार्ताओं में भारतीय पक्ष विशेष रूप से कृषि और दुग्ध क्षेत्र की सुरक्षा सुनिश्चित करने में सफल रहा। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुल्क घटाकर 18 प्रतिशत करने की घोषणा की, जो अमेरिका द्वारा अन्य प्रतिस्पर्धी देशों पर लगाए गए शुल्क से कम है।”
मेक इन इंडिया को मिलेगा बढ़ावा:
गोयल ने कहा कि इस डील का उद्देश्य मेक इन इंडिया, डिजाइन इन इंडिया और इनोवेट इन इंडिया को बढ़ावा देना है। यह ऐतिहासिक समझौता भारत और अमेरिका के रिश्तों को मजबूत करने और देश को 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
सरकार की प्राथमिकता:
केंद्रीय मंत्री ने बताया कि सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता 140 करोड़ भारतीयों की आवश्यकताओं की सुरक्षा करना है। उन्होंने कहा कि देश को विकसित बनने के पथ पर आगे बढ़ने के लिए ऊर्जा, विमानन, डेटा सेंटर और परमाणु ऊर्जा समेत विभिन्न क्षेत्रों में अपनी क्षमता बढ़ाने की आवश्यकता है।
अमेरिका की प्रतिक्रिया:
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर लगाए गए रेसिप्रोकल टैरिफ को 25% से घटाकर 18% करने की घोषणा की। उन्होंने उम्मीद जताई कि भारत अमेरिका से 500 अरब डॉलर के उत्पाद खरीद सकता है, जिसमें ऊर्जा, कोल, टेक्नोलॉजी, कृषि और अन्य उत्पाद शामिल हैं।
विपक्ष का आरोप है कि इस डील में किसानों के हितों का ध्यान नहीं रखा गया, लेकिन पीयूष गोयल ने इसे पूरी तरह खारिज किया और कहा कि यह समझौता दोनों देशों के आर्थिक हितों और किसानों की सुरक्षा को ध्यान में रखकर किया गया है।