Wednesday, February 4

नीमच में दिल दहला देने वाली घटना: मधुमक्खियों के हमले में आंगनवाड़ी कुक ने दी जान, 20 बच्चों को बचाकर बनी मिसाल

नीमच। मध्यप्रदेश के नीमच जिले से मानवता और साहस की मिसाल पेश करने वाली एक मार्मिक घटना सामने आई है। जिले की माधवाड़ा पंचायत के रानपुर गांव स्थित आंगनवाड़ी केंद्र में कार्यरत कुक कंचन बाई मेघवाल ने मधुमक्खियों के जानलेवा हमले के दौरान अपनी जान की परवाह किए बिना 20 बच्चों की जान बचा ली, लेकिन खुद इस हमले में शहीद हो गईं। उनकी बहादुरी की पूरे जिले में चर्चा हो रही है और गांव में शोक की लहर है।

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खेलते बच्चों पर टूट पड़ा मधुमक्खियों का झुंड

घटना सोमवार की बताई जा रही है। आंगनवाड़ी केंद्र में बच्चे खेल रहे थे, तभी अचानक मधुमक्खियों का बड़ा झुंड बच्चों की ओर बढ़ा और हमला कर दिया। मधुमक्खियों के हमले से बच्चों में अफरा-तफरी मच गई और वे डरकर इधर-उधर भागने लगे।

तिरपाल-चटाई से बच्चों को लपेटकर बचाया

इसी दौरान आंगनवाड़ी कुक कंचन बाई मेघवाल ने अद्भुत साहस दिखाया। उन्होंने तुरंत तिरपाल और चटाई का सहारा लेकर बच्चों को उसमें लपेटा और एक-एक कर सभी बच्चों को सुरक्षित आंगनवाड़ी केंद्र के अंदर पहुंचा दिया। बच्चों को बचाने के दौरान मधुमक्खियों ने कंचन बाई पर हमला कर दिया और उन्हें सैकड़ों डंक मार दिए।

स्कूल परिसर में बेहोश होकर गिरीं, अस्पताल में मृत घोषित

मधुमक्खियों के हमले से गंभीर रूप से घायल कंचन बाई वहीं स्कूल परिसर में बेहोश होकर गिर पड़ीं। घटना की जानकारी मिलते ही ग्रामीण मौके पर पहुंचे। सूचना पर कॉन्स्टेबल कालूनाथ और पायलट राजेश राठौर भी मौके पर पहुंचे और उन्हें तत्काल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया। डॉक्टरों के अनुसार उनके शरीर पर मधुमक्खियों के अनगिनत डंक थे।

गांव के लिए सिर्फ कुक नहीं, परिवार की रीढ़ थीं कंचन बाई

कंचन बाई मेघवाल रानपुर गांव में केवल आंगनवाड़ी कुक नहीं थीं, बल्कि बच्चों के लिए एक अभिभावक जैसी भूमिका निभाती थीं। वह बच्चों के लिए दोपहर का भोजन तैयार करती थीं और साथ ही ‘जय माता दी’ सेल्फ हेल्प ग्रुप की अध्यक्ष भी थीं। परिवार में वह अकेली कमाने वाली थीं। उनके पति शिवलाल लकवाग्रस्त हैं और परिवार में एक बेटा व दो बेटियां हैं।

गांव में डर का माहौल, छत्ता हटाने और मुआवजे की मांग

घटना के बाद गांव में भय का माहौल है। ग्रामीणों का कहना है कि गांव में केवल एक हैंडपंप है और उसी के पास मधुमक्खियों ने हमला किया था। अब लोग डर के कारण पानी लेने भी वहां नहीं जा रहे हैं।

ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि मधुमक्खियों के छत्ते को तुरंत हटाया जाए, ताकि भविष्य में ऐसी घटना न हो। साथ ही कंचन बाई के परिवार को आर्थिक सहायता और सरकारी मदद दिए जाने की भी मांग उठ रही है।

गांव ने नम आंखों से दी अंतिम विदाई

मंगलवार को पोस्टमार्टम के बाद जब कंचन बाई का शव गांव पहुंचा तो पूरे गांव ने नम आंखों से उन्हें श्रद्धांजलि दी। हर व्यक्ति उनकी बहादुरी को सलाम कर रहा था।

कंचन बाई मेघवाल की यह कुर्बानी हमेशा याद रखी जाएगी, जिन्होंने अपनी जान देकर 20 मासूम बच्चों का जीवन बचाया और समाज के सामने साहस की एक अमिट मिसाल छोड़ गईं।

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