Tuesday, February 3

यूरोप-भारत ट्रेड डील से घबरा गए ट्रंप, स्वीडन के पूर्व पीएम ने अमेरिका पर कसा तंज

स्टॉकहोम/नई दिल्ली: भारत और अमेरिका के बीच हाल ही में हुए ट्रेड डील को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिक्रियाएँ सामने आ रही हैं। स्वीडन के पूर्व प्रधानमंत्री और यूरोपीय काउंसिल ऑन फॉरेन रिलेशन के सह-अध्यक्ष कार्ल बिल्ड्ट ने अमेरिका पर तंज कसते हुए कहा कि भारत और यूरोपीय यूनियन के बीच ट्रेड डील से तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप घबरा गए थे और उन्हें अपनी नीतियों में बदलाव करना पड़ा।

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कार्ल बिल्ड्ट ने अमेरिकी राजदूत सर्गियो गोर के एक इंटरव्यू को अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा किया। इस इंटरव्यू में गोर ने भारत और अमेरिका के बीच हुए ट्रेड डील पर अमेरिका का पक्ष रखा। उन्होंने संकेत दिए कि राष्ट्रपति ट्रंप ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से इस संबंध में फोन पर बातचीत की थी। कार्ल बिल्ड्ट ने लिखा, “भारत के साथ यूरोपीय यूनियन की ट्रेड डील से ट्रंप घबरा गए, और अमेरिका की नीतियों में तेजी से बदलाव करना पड़ा। यह दोनों देशों के लिए सकारात्मक संकेत है।”

भारत-अमेरिका ट्रेड डील के प्रमुख बिंदु

  • अमेरिका ने भारतीय वस्तुओं पर टैरिफ घटाकर 18% करने पर सहमति जताई है।

  • अमेरिका ने अभी तक भारत पर कुल 50% टैरिफ लगाया हुआ था, जिसमें 25% टैरिफ रूस से कच्चे तेल की खरीद पर आधारित था।

  • डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया कि भारत अब रूसी तेल की खरीद कम करके अमेरिका और वेनेजुएला से ऊर्जा का आयात बढ़ाने पर सहमत हुआ है।

  • भारत ने अमेरिका से एनर्जी, टेक्नोलॉजी, एग्रीकल्चर प्रोडक्ट्स और कोयले समेत 500 बिलियन डॉलर से अधिक के उत्पाद खरीदने का वादा किया है।

  • राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि भारत अमेरिकी सामानों पर टैरिफ और नॉन-टैरिफ बाधाओं को कम करके शून्य करेगा।

  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 1.4 अरब भारतीयों की ओर से ट्रंप का आभार व्यक्त किया।

भारत के जियो-पॉलिटिकल एक्सपर्ट सुशांत शरीन ने इस डील को लेकर कहा कि “500 बिलियन डॉलर के अमेरिकी आयात अगले कुछ वर्षों में पूरा किया जाएगा। 5 साल में यह लगभग 100 बिलियन डॉलर सालाना होगा, यानी मौजूदा खरीद का लगभग दोगुना। इसमें तेल, गैस और अन्य वस्तुएं भी शामिल हैं। कृषि आयात को भारतीय किसानों पर असर डाले बिना ही आयात किया जा सकता है।”

इस डील को दोनों देशों के लिए रणनीतिक और आर्थिक दृष्टि से महत्वपूर्ण बताया जा रहा है, जबकि यूरोपीय यूनियन ने भी इस प्रक्रिया में नेतृत्व की भूमिका निभाई है।

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