Tuesday, February 3

सिंधु जल संधि विवाद: भारत ने आर्बिट्रेशन कोर्ट का समन किया खारिज, पाकिस्तान फंसा संकट में

इस्लामाबाद/नई दिल्ली: भारत और पाकिस्तान के बीच सिंधु जल संधि (Indus Waters Treaty) को लेकर विवाद एक बार फिर तेज हो गया है। भारत ने हेग स्थित परमानेंट कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन (PCA) द्वारा जारी समन को औपचारिक रूप से खारिज कर दिया है। भारत ने कहा कि वह इस ट्रिब्यूनल को गैर-कानूनी मानता है और इसके आदेशों का पालन नहीं करेगा।

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पिछले हफ्ते PCA ने भारत से कश्मीर के किशनगंगा और रातले हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट से संबंधित संवेदनशील ऑपरेशनल रिकॉर्ड और डेटा साझा करने को कहा था। भारत ने इस मांग को ठुकराते हुए कहा कि न्यूट्रल एक्सपर्ट प्रक्रिया के बीच एक समानांतर आर्बिट्रेशन कोर्ट का गठन सिंधु संधि के विवाद समाधान ढांचे का उल्लंघन है।

सरकारी सूत्रों के अनुसार, भारत तब तक किसी भी संधि दायित्व को पूरा करने के लिए बाध्य नहीं है जब तक पाकिस्तान सीमा पार आतंकवाद को समर्थन देना बंद नहीं करता और भारत की मौलिक सुरक्षा चिंताओं का समाधान नहीं हो जाता। इसमें हाइड्रोलॉजिकल डेटा साझा करना या मध्यस्थता में भाग लेना शामिल है।

पाकिस्तान की प्रतिक्रिया
पाकिस्तान ने संयुक्त राष्ट्र और अन्य अंतरराष्ट्रीय मंचों पर इस मुद्दे को उठाया है और दुनिया से दखल की अपील की है। पाकिस्तान ने इसे “एक्ट ऑफ वॉर” बताया है और भारत को चेतावनी भी दी है।

1960 में हस्ताक्षरित सिंधु जल संधि, सिंधु बेसिन की छह नदियों के पानी का बंटवारा भारत और पाकिस्तान के बीच करती है। भारत ने पिछले साल अप्रैल में पहलगाम आतंकी हमले के बाद घोषणा की थी कि वह IWT को अस्थायी रूप से रोक रहा है। भारत के इस कदम के कारण पाकिस्तान के सामने जल संकट पैदा होने का खतरा मंडरा रहा है।

विश्लेषकों के अनुसार, भारत का यह निर्णय न केवल पाकिस्तान को दुविधा में डाल रहा है, बल्कि क्षेत्रीय जल सुरक्षा और कूटनीतिक समीकरणों में भी महत्वपूर्ण बदलाव ला सकता है।

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