
जबलपुर – जिले के एक बीपीएल कार्ड धारक और लॉ के छात्र अमन वंशकार ने मध्य प्रदेश पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी (उत्तर मंडल, मनेगांव पिपरिया डीसी) से नियमित और आउटसोर्स कर्मचारियों, साथ ही पंजीकृत उपभोक्ताओं की प्रमाणित जानकारी RTI के तहत मांगी। आम तौर पर बीपीएल आवेदकों को RTI अधिनियम के तहत यह जानकारी मुफ्त मिलनी चाहिए थी, लेकिन विभाग ने उसे जानकारी प्राप्त करने के लिए 4.08 लाख रुपए जमा करने का लिखित नोटिस थमा दिया।
RTI अधिनियम का उल्लंघन
अमन वंशकार ने RTI आवेदन में स्पष्ट किया था कि वह गरीबी रेखा से नीचे (BPL) परिवार से हैं, इसलिए अधिनियम की धारा 7(5) के अनुसार उन्हें जानकारी मुफ्त मिलनी चाहिए। इसके बावजूद लोक सूचना अधिकारी और सहायक अभियंता ने भारी शुल्क का नोटिस थमाया। परेशान छात्र ने मध्य प्रदेश राज्य मानवाधिकार आयोग से शिकायत की और RTI नियमों के उल्लंघन का आरोप लगाया।
आयोग ने कार्रवाई के निर्देश दिए
राज्य मानवाधिकार आयोग ने शिकायत को गंभीरता से लेते हुए जबलपुर जिला कलेक्टर को मामले की निष्पक्ष जांच और उचित कार्रवाई करने का निर्देश दिया है। अधिकारियों ने बताया कि आयोग ने इस घटना पर रिपोर्ट भी मांगी है।
यह घटना सरकारी विभागों द्वारा RTI नियमों के पालन और पारदर्शिता कानून के तहत जानकारी मांगने वाले आर्थिक रूप से कमजोर आवेदकों के साथ व्यवहार पर गंभीर सवाल खड़े करती है।