
बलूचिस्तान में हालिया घटनाओं ने पाकिस्तान की सेना और सरकार को झकझोर कर रख दिया है। शुक्रवार रात बलूच विद्रोहियों ने 12 शहरों में हमले कर 200 से अधिक पाकिस्तानी सैनिकों की मौत का दावा किया। इस हमले में सबसे बड़ी चौंकाने वाली बात यह रही कि इसमें महिला विद्रोहियों की सक्रिय भागीदारी सामने आई।
पाकिस्तान की पॉलिटिकल साइंटिस्ट आयशा सिद्दीका के अनुसार, हथियार उठाने वाली अधिकतर महिलाएं वही हैं जिनके पति या परिवार के पुरुष पाकिस्तानी सेना की कार्रवाइयों में मारे गए या गुम कर दिए गए। इनमें से एक महिला, आसिफा मेंगल, ने अपने 21वें जन्मदिन पर बलूच लिबरेशन आर्मी (BLA) की मजीद ब्रिगेड में शामिल होकर ISI हेडक्वार्टर पर हमला किया। BLA ने पुष्टि की है कि इन दोनों महिला फिदायीन हमलावरों ने जनवरी 2024 में अपने मिशन का निर्णय लिया था।
महिलाओं के हथियार उठाने के बाद बलूचिस्तान पाकिस्तान के लिए खौफ का क्षेत्र बन गया है। जबकि कुछ महिलाएं शांति और राजनीतिक वार्ता के मार्ग पर हैं, सैकड़ों अन्य आत्मघाती हमलावर बनकर अपने वतन की स्वतंत्रता के लिए लड़ रही हैं। मार्च 2025 से महरंग बलूच जैसे शांति-प्रिय कार्यकर्ताओं को क्वेटा में गिरफ्तार कर जेल में रखा गया है।
पिछले वर्षों में भी कई महिला फिदायीन हमलावर सामने आ चुकी हैं। अप्रैल 2022 में शरी बलूच, दो बच्चों की मां, ने कराची विश्वविद्यालय के बाहर आत्मघाती हमला किया। जून 2022 में सुमैया कलंदरानी, पत्रकार और पहले फिदायीन हमलावर की मंगेतर, ने पाकिस्तानी सैन्य काफिले पर हमला किया।
बलूच महिलाओं का यह कदम पाकिस्तान के लिए एक नई चुनौती बन गया है, और यह स्पष्ट कर रहा है कि बलूचिस्तान में विद्रोह अब केवल पुरुषों तक सीमित नहीं रहा।