
नई दिल्ली: सोने की कीमत में पिछले एक साल में करीब 106% की जबरदस्त तेजी आई है। 2025 में सोने की वैश्विक मांग 40% बढ़कर रिकॉर्ड 5,002 टन तक पहुंच गई। अमेरिकी डॉलर के हिसाब से दुनिया ने इस दौरान 552 अरब डॉलर का सोना खरीदा, जो पाकिस्तान की पूरी अर्थव्यवस्था से ज्यादा है।
विशेष ध्यान देने वाली बात यह है कि इस तेजी में चीन की भूमिका अहम रही है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, चीन गुपचुप तरीके से अपना गोल्ड रिजर्व बढ़ा रहा है। हालांकि आधिकारिक आंकड़े बताते हैं कि उसने 27 टन सोना खरीदा, विशेषज्ञों का अनुमान है कि असल खरीद करीब 270 टन की रही होगी।
गोल्ड की खरीद में वैश्विक रुझान:
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पिछले साल ग्लोबल ईटीएफ होल्डिंग में 801 टन की बढ़ोतरी हुई, जो इतिहास में दूसरी सबसे बड़ी वार्षिक वृद्धि है।
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बार और कॉइन की डिमांड 1,374 टन रही, जो पिछले 12 साल में सबसे ज्यादा है।
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केंद्रीय बैंकों ने 863 टन सोना खरीदा, जो 2010-2021 की औसत वार्षिक खरीद 473 टन से कहीं ज्यादा है।
कौन-कौन से देशों के पास सबसे ज्यादा सोना:
गोल्ड रिजर्व के मामले में अमेरिका दुनिया में सबसे आगे है। अमेरिका के पास 8,133 टन सोना है, जबकि कई सालों से इसमें कोई बड़ा बदलाव नहीं हुआ। इसके बाद देशों की स्थिति इस प्रकार है:
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जर्मनी – 3,350 टन
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इटली – 2,452 टन
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फ्रांस – 2,437 टन
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रूस – 2,330 टन
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चीन – 2,304 टन
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स्विट्जरलैंड – 1,040 टन
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भारत – 880 टन
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जापान – 846 टन
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तुर्की – 641 टन
विशेषज्ञों का कहना है कि चीन की यह गुप्त खरीद संकेत देती है कि वह भविष्य में आर्थिक या राजनीतिक चुनौतियों से निपटने के लिए तैयारी कर रहा है। हालांकि अमेरिका अभी भी इस मामले में काफी आगे है, लेकिन चीन की होर्डिंग बढ़ती रही तो भविष्य में अंतर कम होने की संभावना है।