Saturday, January 31

Mother Of All Deals: भारत-EU ऐतिहासिक डील, व्यापार से बढ़कर दोनों के लिए अवसर

 

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भारत और यूरोपियन यूनियन (EU) के बीच हुई ऐतिहासिक द्विपक्षीय व्यापार डील दोनों पक्षों के लिए गेम चेंजर साबित हो सकती है। यूरोपीय कमिशन की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने इस सप्ताह घोषणा की कि यह अब तक की सबसे बड़ी और व्यापक डील है, जो नियमों और मानकों में तालमेल और एक-दूसरे की घरेलू प्राथमिकताओं का सम्मान करती है।

 

आर्थिक पैमाना और संभावनाएं

 

इस डील के लागू होने से लगभग दो अरब लोगों को लाभ मिलेगा। इसका वैश्विक आर्थिक आकार 25 ट्रिलियन डॉलर होगा, जो कुल वैश्विक GDP का 25% और वैश्विक व्यापार का एक तिहाई हिस्सा है। इससे मैन्युफैक्चरिंग, सर्विसेज, रिसर्च और इनोवेशन में लाखों रोजगार सृजित होंगे।

 

यूरोप के टेक सेक्टर को बढ़ावा मिलने के साथ ही भारत को विकसित बाजार तक पहुंच मिलेगी। एक बड़ी यूरोपीय कंपनी के प्रमुख ने बताया कि वह भारत में निर्माण और निवेश के लिए तैयार हैं।

 

उद्योग और FTA का लाभ

 

भारत और यूरोप के बीच मौजूदा द्विपक्षीय व्यापार लगभग 136 अरब डॉलर का है, जो 2032 तक बढ़कर 250 अरब डॉलर हो सकता है।

 

व्यापार बाधाओं में कमी से छोटे और मध्यम उद्योगों को बढ़ावा मिलेगा।

भारतीय कंपोनेंट्स जैसे प्लास्टिक, केमिकल्स, इंजीनियरिंग और इलेक्ट्रिकल पार्ट्स अब यूरोपीय मैन्युफैक्चरिंग में इस्तेमाल हो सकेंगे।

पश्चिमी यूरोप और भारत के बीच सबसे बड़ा आर्थिक कॉरिडोर बनने की क्षमता है।

 

ग्रामीण इलाकों और रोजगार पर असर

 

डील के लाभ से ग्रामीण क्षेत्रों की फैक्ट्रियों और छोटे उद्योग भी समृद्ध होंगे।

 

टेक्सटाइल, रत्न-आभूषण, कपड़े, फुटवियर और समुद्री उत्पाद जैसे क्षेत्रों में रोजगार सृजन।

1 से 1.2 करोड़ नई नौकरियां पैदा होने की संभावना।

लगभग 75 अरब डॉलर के नए भारतीय उत्पादों के लिए बाजार खुलेंगे।

 

रिसर्च, तकनीक और डिजिटल सहयोग

 

यह डील वैज्ञानिक रिसर्च और टेक्नॉलजी में भी बड़े बदलाव लाएगी।

 

भारत ‘Horizon Europe’ जैसे कार्यक्रमों से जुड़कर यूरोपीय रिसर्चर्स के साथ काम करेगा।

AI, सेमीकंडक्टर, मटीरियल साइंस, क्लीन टेक्नॉलजी, हेल्थ और सैनिटेशन में सहयोग बढ़ेगा।

डिजिटल वॉलेट और ग्लोबल सप्लाई चेन में भारत की हिस्सेदारी बढ़ेगी।

 

संसाधन, उत्पादन और पर्यावरण

 

भारत को संसाधनों की कमी के बावजूद बड़े स्तर पर उत्पादन और मैन्युफैक्चरिंग में तेज़ी से तरक्की करने का अवसर मिलेगा।

 

सेमीकंडक्टर, एडवांस्ड बैटरी और हार्डवेयर उत्पादन में क्षमता विकसित होगी।

उत्पादन और उपभोक्ता मानकों में सुधार के साथ कार्बन उत्सर्जन में कमी संभव।

भारत ग्लोबल वैल्यू चेन का अहम हिस्सा बन सकता है, जिससे कामगार सुरक्षित और स्वस्थ रहेंगे।

 

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