
वीएन दास, अयोध्या।
भदरसा के बहुचर्चित गैंगरेप कांड में अदालत से बड़ी राहत मिलने के बावजूद समाजवादी पार्टी के नेता मोइद खान को फिलहाल जेल से रिहाई नहीं मिल पाएगी। कोर्ट ने उन्हें गैंगरेप के आरोप से बरी कर दिया है, लेकिन उनके खिलाफ गैंगस्टर एक्ट के तहत दर्ज मामलों के चलते उनकी रिहाई अटकी हुई है। इस मामले में जमानत के लिए उनके अधिवक्ता मोहम्मद सईद ने कोर्ट में याचिका दाखिल की है।
करीब 19 महीनों से जेल में बंद मोइद खान के परिवार का कहना है कि इस दौरान उन्हें न सिर्फ आर्थिक तबाही झेलनी पड़ी, बल्कि समाज में अपमान और बहिष्कार का भी सामना करना पड़ा। मोइद खान के बेटे जहीर खान का कहना है कि “इस पूरे समय में हमारा सबकुछ उजड़ गया। अब्बू निर्दोष साबित हो चुके हैं, लेकिन जो मानसिक, सामाजिक और आर्थिक नुकसान हुआ, उसकी भरपाई कैसे होगी?”
“बलात्कारी का परिवार” कहकर किया गया बहिष्कार
जहीर खान ने बताया कि केस के बाद लोग उनके परिवार से दूरी बनाने लगे। हालात ऐसे बन गए कि उनकी छोटी चचेरी बहन को स्कूल में ताने सुनने पड़े और वह कई महीनों तक पढ़ाई के लिए स्कूल ही नहीं जा सकी। परिवार की 66 वर्षीय दादी गंभीर रूप से बीमार हैं, जिनका इलाज लखनऊ में चल रहा है।
रोजगार पर चला बुलडोजर, परिवार बेकार
परिवार का कहना है कि उन्हें मीडिया में गलत तरीके से करोड़पति बताकर पेश किया गया, जबकि वास्तविकता इससे बिल्कुल अलग है। जहीर के मुताबिक, “हम लोग सूरत में रहकर सिलाई का काम करते थे। कोरोना काल में अयोध्या लौटे और भदरसा में बेकरी शुरू की, जिससे परिवार का खर्च चलता था। लेकिन उस बेकरी पर बुलडोजर चल गया और आज हमारे पास रोजी-रोटी का कोई साधन नहीं है।”
उन्होंने बताया कि बेकरी जिस जमीन पर थी, वह अमेरिका में रहने वाले जानकी प्रसाद की है। उस बेकरी की देखरेख की जिम्मेदारी मोइद खान पर थी और उसी से मिलने वाले पारिश्रमिक से परिवार का गुजारा होता था। पारिवारिक बंटवारे में मोइद खान को महज 15 बिस्वा जमीन ही मिली है।
बहनों को ससुराल में झेलना पड़ा अपमान
जहीर ने बताया कि परिवार में माता-पिता के अलावा चार भाई और तीन बहनें हैं। बहनों की शादी हो चुकी है, लेकिन इस केस के कारण उन्हें अपने ससुराल में भी अपमान और तानों का सामना करना पड़ा।
राजनीतिक साजिश का आरोप
जहीर खान ने आरोप लगाया कि भदरसा रेप केस में उनके पिता को राजनीतिक लाभ के लिए फंसाया गया। उन्होंने कहा, “मुख्यमंत्री को गलत सूचनाएं देकर यह कार्रवाई कराई गई। मिल्कीपुर उपचुनाव में इस मुद्दे को भुनाया गया और लोकसभा चुनाव में हार का बदला लेने के लिए हमारे परिवार को निशाना बनाया गया। हम कोई राजनीतिक परिवार नहीं हैं, हम सिर्फ मेहनत-मजदूरी कर जीने वाले लोग हैं।”
रेप के आरोप से बरी होने के बाद भी जेल में बंद मोइद खान और उनके परिवार का सवाल अब यही है—क्या निर्दोष साबित होने के बाद भी झेले गए 19 महीनों के कष्ट, बदनामी और उजड़े भविष्य की कोई भरपाई संभव है?