Friday, January 30

Economic Survey 2026: सरकारी कंपनियों की नई परिभाषा, अब सिर्फ 26% हिस्सेदारी होने पर भी कंपनी को माना जा सकता है सरकारी

 

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सरकार ने आर्थिक समीक्षा 2025-26 में सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों की परिभाषा बदलने का सुझाव दिया है। अब 51% की बजाय केवल 26% हिस्सेदारी होने पर भी किसी कंपनी को सरकारी माना जा सकेगा। इसका उद्देश्य उन कंपनियों से बाहर निकलने की प्रक्रिया को आसान बनाना है, जिनमें सरकार अब निवेश नहीं करना चाहती।

 

मुख्य बिंदु:

 

वर्तमान कानून के अनुसार किसी कंपनी को सरकारी कंपनी कहलाने के लिए केंद्र या राज्य सरकार की कम से कम 51% हिस्सेदारी होना जरूरी है।

आर्थिक सलाहकार वी अनंत नागेश्वरन और उनकी टीम ने सुझाव दिया है कि 26% हिस्सेदारी होने पर भी कंपनी सरकारी मानी जा सकती है। इससे सरकार महत्वपूर्ण फैसलों पर प्रभाव बनाए रख सकती है, जबकि दिन-प्रतिदिन के प्रबंधन में निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ेगी।

यह बदलाव ‘ऑफर फॉर सेल’ (OFS) के माध्यम से कंपनियों की हिस्सेदारी बेचने और निजीकरण की प्रक्रिया को सरल बनाएगा।

 

निजीकरण की दिशा में कदम:

साल 2016 से अब तक 36 सरकारी कंपनियों के निजीकरण को मंजूरी मिली है। इनमें से 13 कंपनियों के सौदे पूरे हो चुके हैं, जबकि बाकी विभिन्न चरणों में हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह नई परिभाषा सरकारी कंपनियों के निजीकरण की प्रक्रिया को तेज करेगी और सरकारी खजाने को लाभ पहुंचाएगी।

 

प्रभाव और लाभ:

 

सरकार को उन कंपनियों से बाहर निकलने में आसानी होगी, जो अब उसके मुख्य एजेंडे का हिस्सा नहीं हैं।

कम हिस्सेदारी होने पर निजी क्षेत्र का प्रबंधन में अधिक प्रभाव होगा, जिससे कंपनियों का प्रदर्शन बेहतर होने की संभावना बढ़ेगी।

यह कदम सरकारी कंपनियों के लिए ‘एक्जिट स्ट्रेटेजी’ तैयार करने और उनके संचालन में दक्षता बढ़ाने का अवसर देगा।

 

विशेषज्ञों के अनुसार, यह प्रस्ताव केवल कानूनी रूपरेखा बदलने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सरकारी कंपनियों के प्रबंधन और उनके व्यावसायिक प्रदर्शन को नई दिशा देने वाला कदम हो सकता है।

 

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