Friday, January 30

राफेल के चयन से सुपर हॉर्नेट को झटका, बोइंग की उम्मीदों पर फिरा पानी भारतीय नौसेना की डील हाथ से निकलते ही अमेरिकी लड़ाकू विमान का भविष्य संकट में

 

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भारतीय नौसेना द्वारा फ्रांसीसी राफेल मरीन फाइटर जेट को चुने जाने के बाद अमेरिकी रक्षा कंपनी बोइंग को बड़ा झटका लगा है। भारत से सौदा न हो पाने के कारण F/A-18E/F सुपर हॉर्नेट लड़ाकू विमान का भविष्य लगभग तय माना जा रहा है। अब संकेत मिल रहे हैं कि दशकों तक अमेरिकी नौसैनिक शक्ति का प्रतीक रहा यह विमान जल्द ही इतिहास का हिस्सा बन सकता है।

 

बोइंग लंबे समय से सुपर हॉर्नेट के लिए नए अंतरराष्ट्रीय ग्राहकों की तलाश में थी और उसकी आखिरी उम्मीद भारत पर टिकी थी। कंपनी ने भारत को तकनीक हस्तांतरण (टेक्नोलॉजी ट्रांसफर) और ‘मेक इन इंडिया’ के तहत देश में ही विमान निर्माण का प्रस्ताव भी दिया था। भारतीय नौसेना ने इसके लिए सुपर हॉर्नेट का परीक्षण भी किया, लेकिन अंततः उसने फ्रांसीसी राफेल मरीन को प्राथमिकता दी।

 

2027 तक बंद होगी प्रोडक्शन लाइन

 

भारत से डील नहीं मिलने के बाद बोइंग ने पहले ही संकेत दे दिए थे कि वह सुपर हॉर्नेट की प्रोडक्शन लाइन 2025 के अंत तक बंद कर देगी। हालांकि अमेरिकी नौसेना ने हाल ही में 17 ब्लॉक-III सुपर हॉर्नेट विमानों की खरीद और रखरखाव से जुड़े तकनीकी डेटा पैकेज के लिए 1.3 अरब डॉलर का कॉन्ट्रैक्ट दिया है, जिससे इस कार्यक्रम को कुछ समय के लिए राहत मिली है। इसके बावजूद बोइंग ने स्पष्ट कर दिया है कि 2027 में आखिरी कॉन्ट्रैक्ट पूरा होते ही उत्पादन पूरी तरह बंद कर दिया जाएगा।

 

नॉर्थ्रॉप ग्रुम्मन का संकेत

 

सुपर हॉर्नेट कार्यक्रम से जुड़ी प्रमुख सब-कॉन्ट्रैक्टर कंपनी नॉर्थ्रॉप ग्रुम्मन ने 28 जनवरी को एक तिमाही कॉल में बताया कि उसने 2025 में सुपर हॉर्नेट के लिए फ्यूजलेज और वर्टिकल टेल जैसे अहम हिस्सों की अंतिम खेप पूरी कर ली है। इससे साफ हो गया है कि मिसौरी के सेंट लुइस स्थित बोइंग प्लांट में इस विमान की उत्पादन यात्रा अब अंतिम चरण में है।

 

हालांकि उत्पादन बंद होने के बाद भी बोइंग अमेरिकी नौसेना के लिए विमानों के अपग्रेड और सर्विस लाइफ मॉडिफिकेशन (SLM) का काम जारी रखेगी। इसके लिए कंपनी को हाल ही में 930.77 मिलियन डॉलर का एक और कॉन्ट्रैक्ट मिला है।

 

अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी नहीं मिली सफलता

 

बोइंग ने कनाडा, जर्मनी, पोलैंड और स्विट्ज़रलैंड जैसे देशों को सुपर हॉर्नेट ब्लॉक-III बेचने की कोशिश की, लेकिन उसे अपेक्षित सफलता नहीं मिली। इन देशों ने या तो राफेल को चुना या फिर स्वीडन के साब ग्रिपेन को तरजीह दी। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत का फैसला सुपर हॉर्नेट के लिए निर्णायक साबित हुआ।

 

राफेल पर भारत का भरोसा

 

भारत ने एक बार फिर फ्रांसीसी राफेल फाइटर जेट पर भरोसा जताया है। इससे पहले भारतीय वायुसेना के लिए राफेल की खरीद हो चुकी है और अब नौसेना के लिए राफेल मरीन का चयन किया गया है। रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, यह फैसला भारत-फ्रांस रणनीतिक साझेदारी को और मज़बूत करता है।

 

कुल मिलाकर, भारतीय डील हाथ से निकलते ही F/A-18 सुपर हॉर्नेट का वैश्विक दौर लगभग समाप्ति की ओर बढ़ गया है, जबकि राफेल ने एक बार फिर खुद को सबसे भरोसेमंद विकल्प साबित किया है।

 

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