
सुप्रीम कोर्ट ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के नए नियमों पर फिलहाल रोक लगा दी है। शीर्ष अदालत ने इस मामले में केंद्र सरकार और यूजीसी को नोटिस जारी करते हुए जवाब तलब किया है। कोर्ट के इस फैसले का भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के सांसदों ने स्वागत किया है, हालांकि इसे लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है।
निशिकांत दुबे बोले— सुप्रीम कोर्ट ने वही किया जो मैंने कहा
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद बीजेपी के लोकसभा सांसद निशिकांत दुबे का बयान सुर्खियों में है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट करते हुए लिखा कि सुप्रीम कोर्ट ने वही किया है, जिसकी वह मांग कर रहे थे। दुबे ने कहा कि पिछले दो दिनों से संसद चल रही है, लेकिन किसी भी राजनीतिक दल के सदस्य ने इस मुद्दे पर गंभीर चर्चा करना उचित नहीं समझा।
झारखंड के गोड्डा से सांसद निशिकांत दुबे ने आगे कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार ने आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) को 10 प्रतिशत आरक्षण देकर गरीबों के हितों की रक्षा की, लेकिन इसके बावजूद सरकार को निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने लोगों से प्रधानमंत्री मोदी पर भरोसा रखने की अपील करते हुए कहा कि देश के कानून संविधान की धारा 14 और 15 के तहत ही चलेंगे।
गिरिराज सिंह ने भी जताया आभार
बीजेपी के वरिष्ठ नेता और केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने भी सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत किया। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि यूजीसी के उन नियमों पर रोक लगाई गई है, जो सनातन को बांटने का प्रयास कर रहे थे। उन्होंने इसे भारत की सांस्कृतिक एकता और सनातन मूल्यों की रक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।
सोशल मीडिया पर क्रेडिट लेने के आरोप
हालांकि, सोशल मीडिया पर कुछ लोगों ने बीजेपी नेताओं पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले का श्रेय लेने का आरोप भी लगाया है। यूजर्स का कहना है कि न्यायिक फैसलों को राजनीतिक उपलब्धि के रूप में पेश करना उचित नहीं है।
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को यूजीसी के नए नियमों को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए इन पर रोक लगा दी। अदालत ने केंद्र सरकार और यूजीसी को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अगली सुनवाई 19 मार्च को होगी और तब तक 2012 के यूजीसी नियम ही लागू रहेंगे।