
भारत शनिवार को दूसरी भारत-अरब विदेश मंत्रियों की बैठक की मेजबानी करेगा। दस वर्ष बाद हो रही इस महत्वपूर्ण बैठक की सह-अध्यक्षता भारत और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) संयुक्त रूप से करेंगे। बैठक में अर्थव्यवस्था, ऊर्जा, शिक्षा, मीडिया और संस्कृति जैसे प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में सहयोग को लेकर विस्तार से चर्चा होने की संभावना है।
इस सम्मेलन में भाग लेने के लिए कई अरब देशों के विदेश मंत्री भारत पहुंच चुके हैं। सूडान गणराज्य के विदेश मंत्री मोहिएलदीन सलीम अहमद इब्राहिम, फिलिस्तीन की विदेश मंत्री वर्सेन शाहीन अघाबेकियन और कोमोरोस के विदेश मंत्री मोहम्मद चानफिउ नई दिल्ली आ चुके हैं, जबकि अन्य देशों के प्रतिनिधियों का आगमन होना बाकी है।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने सोशल मीडिया पोस्ट के माध्यम से मेहमान नेताओं का स्वागत करते हुए कहा कि उनकी भारत यात्रा से भारत और अरब देशों के बीच आपसी संबंध और अधिक मजबूत होंगे। इस बैठक में अरब लीग के सदस्य देशों के विदेश मंत्री और महासचिव भी भाग लेंगे।
दस साल बाद हो रही अहम बैठक
भारत-अरब विदेश मंत्रियों की पिछली बैठक वर्ष 2016 में बहरीन में आयोजित हुई थी। उस बैठक में दोनों पक्षों ने पांच प्राथमिकता वाले क्षेत्रों—अर्थव्यवस्था, ऊर्जा, शिक्षा, मीडिया और संस्कृति—की पहचान की थी। मौजूदा बैठक में इन क्षेत्रों में अब तक हुई प्रगति की समीक्षा के साथ-साथ साझेदारी को और गहरा करने पर विचार किया जाएगा।
भारत में पहली बार आयोजन
यह पहली बार है जब भारत-अरब विदेश मंत्रियों की बैठक भारत में आयोजित की जा रही है। वर्ष 2002 में भारत और अरब देशों के बीच इस संवाद को संस्थागत रूप दिया गया था। इसके बाद 2008 में अरब-भारत सहयोग मंच की स्थापना के लिए सहयोग ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए, जिसे 2013 में संशोधित किया गया।
क्षेत्रीय हालात के बीच अहम सम्मेलन
बैठक से एक दिन पहले शुक्रवार को भारत-अरब वरिष्ठ अधिकारियों की चौथी बैठक भी प्रस्तावित है। पश्चिम एशिया के मौजूदा हालात और क्षेत्र में शांति स्थापित करने से जुड़े अंतरराष्ट्रीय प्रयासों के मद्देनजर यह सम्मेलन खासा महत्वपूर्ण माना जा रहा है। जानकारों के अनुसार, यह बैठक भारत और अरब देशों के बीच रणनीतिक सहयोग को नई दिशा दे सकती है।