
महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार के विमान हादसे में निधन के बाद राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के सियासी भविष्य को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। यह सवाल उठने लगा है कि अजित पवार पार्टी को किस स्थिति में छोड़कर गए हैं और अब एनसीपी का भविष्य कैसा होगा।
अजित पवार का राजनीतिक सफर
अजित पवार ने 1991 में पहली बार कांग्रेस से लोकसभा चुनाव जीतकर राजनीति में कदम रखा था। इसके बाद शरद पवार के नेतृत्व में एनसीपी में उनका करियर लगातार उभरता गया। बारामती से लगातार जीत हासिल करने वाले अजित पवार ने जुलाई 2023 में एनसीपी को अपने हाथों में लिया। हाल ही में हुए लोकसभा और विधानसभा चुनावों में पार्टी ने कमबैक करते हुए अपनी ताकत दिखाई।
एनसीपी की वर्तमान स्थिति
अजित पवार के नेतृत्व में एनसीपी के पास महाराष्ट्र और केंद्र में निम्नलिखित स्थिति थी:
| सदन | सीटें |
| लोकसभा | 1 |
| राज्यसभा | 3 |
| महाराष्ट्र विधानसभा | 41 |
| महाराष्ट्र विधानपरिषद | 8 |
(इसके अलावा अरुणाचल प्रदेश में एनसीपी के तीन विधायक हैं और कुछ अन्य राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों में भी एनसीपी की उपस्थिति है।)
एनसीपी के दो खेमों का विलय
शरद पवार ने 10 जून, 1999 को एनसीपी का गठन किया था। जुलाई 2023 में अजित पवार ने पार्टी अपने नेतृत्व में ली, जबकि शरद पवार गुट ने एनसीपी (शरद चंद्र पवार) अलग बनाई। अगर दोनों गुटों का विलय होता है तो एनसीपी की ताकत बढ़ जाएगी। शरद पवार गुट के राज्यसभा में 2 और लोकसभा में 8 सदस्य, महाराष्ट्र विधानसभा में 10 और विधान परिषद में 3 सदस्य हैं। विलय के बाद एनसीपी के पास केंद्र में 9 सांसद और महाराष्ट्र विधानसभा में 50 विधायक होंगे।
अजित पवार की अचानक मौत ने न केवल एनसीपी के दोनों खेमों के विलय की प्रक्रिया को चुनौतीपूर्ण बना दिया है, बल्कि पार्टी के भविष्य और महाराष्ट्र की राजनीति में संतुलन पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।