
अगर आपकी प्रेग्नेंसी हाल ही में कंफर्म हुई है, तो टाइम्स फ्यूचर ऑफ मैटरनिटी (TFM 2026) समिट और एक्सपो आपके लिए खास अवसर लेकर आ रहा है। 28 मार्च 2026 को दिल्ली-एनसीआर में आयोजित इस समिट में कपल्स सीधे गाइनेकोलॉजिस्ट और फर्टिलिटी एक्सपर्ट्स से प्रेग्नेंसी और अल्ट्रासाउंड से जुड़े सवाल पूछ सकेंगे।
प्रेग्नेंसी स्कैन क्यों जरूरी हैं
डॉक्टर प्रेग्नेंसी के दौरान अलग-अलग चरणों में कई अल्ट्रासाउंड टेस्ट कराने की सलाह देते हैं। ये टेस्ट बच्चे की ग्रोथ, स्थिति, पोषण और ओवरऑल डेवलपमेंट की जानकारी देते हैं। साथ ही, इससे यह भी पता चलता है कि बच्चे में कोई जेनेटिक या जन्मजात समस्या तो नहीं है।
प्रेग्नेंसी में किए जाने वाले मुख्य स्कैन
- डेटिंग स्कैन (6-10 सप्ताह):
गर्भावस्था की सटीक उम्र, डिलीवरी की संभावित तारीख और बच्चे की धड़कन का पता चलता है।
सवाल: बच्चे की हार्टबीट आ गई है या नहीं? गर्भ में एक बच्चा है या जुड़वां?
- एनटी-एनबी स्कैन (11-14 सप्ताह):
शिशु में गुणसूत्रीय असामान्यताओं जैसे डाउन सिंड्रोम और एडवर्ड सिंड्रोम का आकलन।
सवाल: जोखिम मिलने पर आगे क्या कदम उठाए जा सकते हैं?
- एनोमली स्कैन (18-22 सप्ताह):
बच्चे के अंगों, दिल, रीढ़, किडनी और अन्य संरचना की जांच।
सवाल: स्कैन न कराना किस हद तक जोखिम भरा हो सकता है?
- ग्रोथ स्कैन (28-32 सप्ताह):
बच्चे का वजन, ग्रोथ, एम्नियोटिक फ्लूड की मात्रा और पोजिशन।
सवाल: अगर विकास सही नहीं है तो क्या उपाय किए जा सकते हैं?
- कलर डॉपलर स्कैन:
हाई-रिस्क प्रेग्नेंसी में ब्लड फ्लो की जांच।
सवाल: एम्नियोटिक फ्लूड कम होने पर डाइट या अन्य उपाय कैसे मदद कर सकते हैं?
कैसे शामिल हों TFM 2026 में
TFM 2026 समिट और एक्सपो में हिस्सा लेने के लिए इच्छुक कपल्स [यहां क्लिक करके पंजीकरण कर सकते हैं]। पार्टनरशिप या अन्य सहयोग संबंधी जानकारी के लिए डायरेक्ट लिंक के माध्यम से संपर्क किया जा सकता है।
TFM 2026 कपल्स के लिए प्रेग्नेंसी के हर चरण में सही जानकारी लेने और एक्सपर्ट से सीधे सवाल पूछने का विशेष अवसर है।