
नई दिल्ली: ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय सेना ने न सिर्फ मैदान में, बल्कि एक अदृश्य मोर्चे पर भी जंग लड़ी – फेक न्यूज और दुष्प्रचार का मोर्चा। पाकिस्तान की ओर से सोशल मीडिया पर फैलाए जा रहे झूठे वीडियो, भ्रामक दावे और डिसइन्फॉर्मेशन ने सेना के अभियानों और संस्थानों की साख को चुनौती दी। इनसे निपटने में भारतीय सेना और अन्य एजेंसियों ने समय और संसाधनों का महत्वपूर्ण हिस्सा लगाया।
चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान ने बताया कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान करीब 15 प्रतिशत समय फर्जी और झूठी खबरों का जवाब देने में लगा। अब इस चुनौती से निपटने के लिए सेना को जल्द ही स्वदेशी AI आधारित सिस्टम मिलने वाला है।
भारतीय सेना ने इस उद्देश्य के लिए भारतीय विज्ञान संस्थान (IISc), बेंगलुरु के साथ एक एमओयू पर हस्ताक्षर किए हैं। इसके तहत विकसित AI सिस्टम सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म्स पर फैलने वाली मिसइन्फॉर्मेशन और भ्रामक कंटेंट की पहचान, निगरानी और रिपोर्टिंग करेगा। यह तकनीकी समाधान पूरी तरह स्वदेशी होगा और डेटा सुरक्षा तथा सूचना सप्रभुता सुनिश्चित करेगा।
सेना के अधिकारियों ने बताया कि फेक न्यूज की सबसे बड़ी चुनौती इसकी पहचान है। सोशल मीडिया का दायरा विशाल और तेज है, जिससे मैन्युअल निगरानी मुश्किल हो जाती है। इसके अलावा विदेशी सिस्टम इस्तेमाल करने पर डेटा और सूचना की सुरक्षा का खतरा भी बना रहता है।
इस समस्या से निपटने के लिए IISc बेंगलुरु अपने औद्योगिक साझेदार Indy Astra के सहयोग से AI सिस्टम विकसित करेगा। इसका डिजाइन, विकास और संचालन पूरी तरह भारत में होगा। इससे न केवल डेटा सुरक्षा सुनिश्चित होगी बल्कि सेना की डिजिटल तैयारी और जवाबदेही भी मजबूत होगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस कदम से भारतीय सेना को फेक न्यूज और दुष्प्रचार के खिलाफ एक प्रभावी डिजिटल हथियार मिलेगा, जो भविष्य के ऑपरेशनों में निर्णायक भूमिका निभा सकता है।