
पर्सनल लोन लेने का चलन देश में तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन यह पैसे का खर्च करने का शौक नहीं, बल्कि जरूरी परिस्थितियों की वजह से है। पैसाबाजार की हालिया कंज्यूमर रिसर्च रिपोर्ट ‘द पर्सनल लोन स्टोरी’ के मुताबिक, सबसे अधिक लोग मेडिकल इमरजेंसी यानी आकस्मिक इलाज के खर्चों के लिए पर्सनल लोन ले रहे हैं।
सर्वे में सामने आया है कि भारत में करीब 11% लोग इलाज और स्वास्थ्य संबंधित आपात परिस्थितियों के लिए पर्सनल लोन लेते हैं। बड़े शहरों यानी टियर 1 (दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, चेन्नई, बेंगलुरु, हैदराबाद) में यह आंकड़ा 14% तक पहुँच जाता है। वहीं, टियर 2 शहरों में यह 10% और टियर 3 शहरों में 8% है। यह दर्शाता है कि इलाज का खर्च बढ़ रहा है और हेल्थ इंश्योरेंस कवरेज भी सीमित है।
इन चीजों के लिए भी लिया जा रहा लोन
मेडिकल इमरजेंसी के अलावा लोग अपनी रोजमर्रा की जरूरी चीजों और ख्वाहिशों को पूरा करने के लिए भी लोन का सहारा ले रहे हैं। सर्वे के अनुसार, लगभग 48% लोग घर की जरूरतों और अचानक हुई मरम्मत के लिए लोन लेते हैं। वहीं, 36% लोग अपनी लाइफस्टाइल को बेहतर बनाने के लिए और 16% लोग बिजनेस से जुड़े कामों के लिए पर्सनल लोन का इस्तेमाल कर रहे हैं।
छोटे शहरों में ज्यादा लोन लेने की प्रवृत्ति
रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि टियर 3 शहरों के लोग अपनी रोजमर्रा की जरूरतों के लिए टियर 1 शहरों की तुलना में 2.4 गुना अधिक लोन लेते हैं। मिडिल क्लास, खासकर जिनकी सालाना आय 7.5 लाख से 10 लाख रुपये के बीच है, अपनी ख्वाहिशों को पूरा करने के लिए पर्सनल लोन का अधिक उपयोग कर रहे हैं। इनमें से 40% लोग अपने जीवनशैली से जुड़ी चीजों पर खर्च करने के लिए लोन लेते हैं।
पैसाबाजार की सीईओ संतोष अग्रवाल का कहना है कि अब लोग केवल ब्याज दर या लोन की पात्रता देखकर लोन नहीं लेते। उनकी ज़रूरत, ख्वाहिश और जीवन के खास मौके अब लोन लेने के फैसले में प्रमुख भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने कहा, “लोगों के व्यवहार में बदलाव को समझना और सभी के लिए भरोसेमंद, पारदर्शी और आसान तरीके से लोन उपलब्ध कराना अब बेहद जरूरी हो गया है।”