
नई दिल्ली: एयर इंडिया के बोइंग 787 ड्रीमलाइनर विमान दुर्घटना की जांच अभी जारी है, लेकिन अब इस मामले में नया मोड़ सामने आया है। एक अमेरिकी विमान सुरक्षा समूह (Aviation Safety Group) ने दावा किया है कि दुर्घटनाग्रस्त विमान में पहले से कई तकनीकी खराबियां मौजूद थीं। इनमें एक इन-फ्लाइट फायर की घटना भी शामिल है।
बीते साल जून में हुआ हादसा
टाटा ग्रुप की एयर इंडिया द्वारा संचालित यह विमान 12 जून, 2025 को अहमदाबाद से लंदन के लिए उड़ान भरने के तुरंत बाद दुर्घटनाग्रस्त हो गया था। इस हादसे में 260 लोगों की जान चली गई थी।
तकनीकी खराबियों का इतिहास
फाउंडेशन फॉर एविएशन सेफ्टी (FAS) ने अमेरिकी सीनेट की स्थायी जांच उपसमिति को रिपोर्ट भेजी। इसमें कहा गया है कि विमान एयर इंडिया के साथ अपनी सेवा के पहले दिन से ही सिस्टम की खराबियों से जूझ रहा था।
रिपोर्ट के अनुसार बार-बार इलेक्ट्रॉनिक्स और सॉफ्टवेयर की दिक्कतें आईं। सर्किट ब्रेकर ट्रिप हो रहे थे, वायरिंग खराब हो रही थी, शॉर्ट सर्किट हो रहे थे और पावर सिस्टम के पुर्जे सामान्य से ज़्यादा गर्म हो रहे थे।
पिछले हादसे की जानकारी
रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि जनवरी 2022 में फ्रैंकफर्ट हवाई अड्डे पर विमान के P100 पावर डिस्ट्रीब्यूशन पैनल में आग लग गई थी। इस पैनल को पूरी तरह बदलना पड़ा। यह पैनल इंजन द्वारा उत्पन्न हाई-वोल्टेज बिजली को पूरे विमान में वितरित करता है।
787 में बिजली प्रणालियों पर अधिक निर्भरता
787 ड्रीमलाइनर में बिजली प्रणालियों पर सामान्य विमान से अधिक निर्भरता है। शुरुआत में भी सुरक्षा संबंधी समस्याएं देखी गई थीं, जैसे कि 2013 में जापान एयरलाइंस के विमान में बैटरी में आग लगना।
भारत में जारी जांच
अहमदाबाद दुर्घटना की जांच भारतीय विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो (AAIB) कर रहा है। इसमें अमेरिकी अधिकारी भी शामिल हैं क्योंकि विमान और इंजन अमेरिका में डिजाइन और निर्मित किए गए थे। प्रारंभिक रिपोर्ट में कहा गया कि उड़ान भरने के तुरंत बाद विमान के फ्यूल कंट्रोल स्विच को ‘रन’ से ‘कट-ऑफ’ किया गया था, जिससे इंजन को ईंधन मिलना बंद हो गया।
पीड़ितों के वकील, सुरक्षा कार्यकर्ता और तकनीकी विशेषज्ञों का कहना है कि पायलट की गलती पर ध्यान केंद्रित करना जल्दबाजी हो सकती है। उनका तर्क है कि दुर्घटना के पीछे तकनीकी कारणों का भी बड़ा हाथ हो सकता है।