
पुणे: 24 वर्षीय केमिकल इंजीनियर कल्याणी चवली ने लैब की जगह रसोई में अपनी प्रतिभा दिखाई और ‘सहृदया फूड्स’ (Sahrudaya Foods) नाम का स्टार्टअप खड़ा किया। 2021 में शुरू हुई इस कंपनी का उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं को रोजगार देना और उपभोक्ताओं को सेहतमंद स्नैक्स एवं मिठाइयां प्रदान करना है। आज सहृदया फूड्स का मासिक रेवेन्यू 2 लाख रुपये से अधिक है।
इंजीनियरिंग से उद्यमिता तक का सफर
कल्याणी मूल रूप से हैदराबाद की हैं और पुणे में पली-बढ़ीं। मुंबई के ICT से पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने उच्च शिक्षा के लिए विदेश जाने का मन बनाया था, लेकिन कोरोना महामारी ने उनका प्लान बदल दिया। इस समय का उपयोग करते हुए उन्होंने महाराष्ट्र के पाबल गांव में विज्ञान आश्रम के एक प्रोजेक्ट में काम किया और ग्रामीण महिलाओं से मिली जो पारंपरिक और पौष्टिक व्यंजन बनाने में माहिर थीं। इसी अनुभव से ‘सहृदया फूड्स’ की नींव पड़ी।
विशेषज्ञता का सही इस्तेमाल
कल्याणी ने अपनी केमिकल इंजीनियरिंग की विशेषज्ञता का उपयोग खाद्य पदार्थों के पोषण को बरकरार रखने में किया। उदाहरण के लिए, मोरिंगा (सहजन) की चिक्की बनाते समय वह इसे अधिक गर्म नहीं करतीं ताकि विटामिन-C नष्ट न हो। उनके उत्पादों में मैदा, रिफाइंड शुगर या प्रिजर्वेटिव्स का इस्तेमाल नहीं होता। सहृदया फूड्स के ‘गारेलु’, ‘मोरिंगा चिक्की’ और ‘सप्तधान्य लड्डू’ अब दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु के साथ जापान और अमेरिका तक लोकप्रिय हैं।
सामाजिक बदलाव और अनूठा बिजनेस मॉडल
कल्याणी का स्टार्टअप केवल मुनाफे के लिए नहीं है। अब तक उन्होंने असम, जयपुर और महाराष्ट्र की 160 से अधिक महिलाओं को ट्रेनिंग दी है। सहृदया के किचन में काम करने वाली महिलाएं वेतन पाती हैं और कंपनी के 70% कच्चे माल की सप्लाई भी इन्हीं महिलाओं के खेतों से होती है। कल्याणी की मां लक्ष्मी भी इस काम में उनका सहयोग करती हैं, जिससे महिलाओं को घर जैसा माहौल मिलता है।
2 लाख रुपये महीने की कमाई
शुरुआत में कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा। कल्याणी ने हार नहीं मानी और कोविड केयर सेंटरों को इम्यूनिटी-बूस्टिंग स्नैक्स भेजकर अपनी पहचान बनाई। आज सहृदया फूड्स का मासिक रेवेन्यू 2 लाख रुपये से अधिक है। उन्हें ‘स्टार्टअप इंडिया’ से 10.4 लाख रुपये की ग्रांट और द बुद्धा इंस्टीट्यूट से फेलोशिप भी मिल चुकी है।
निष्कर्ष:
कल्याणी का मानना है कि भारत तेजी से बढ़ रहा है और वह अपनी पारंपरिक विरासत को वैश्विक स्तर पर पहुंचाकर इस विकास का हिस्सा बनना चाहती हैं। उनके इस सफर से साबित होता है कि सही दृष्टिकोण और मेहनत से किसी भी चुनौती को अवसर में बदला जा सकता है।
पुणे: 24 वर्षीय केमिकल इंजीनियर कल्याणी चवली ने लैब की जगह रसोई में अपनी प्रतिभा दिखाई और ‘सहृदया फूड्स’ (Sahrudaya Foods) नाम का स्टार्टअप खड़ा किया। 2021 में शुरू हुई इस कंपनी का उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं को रोजगार देना और उपभोक्ताओं को सेहतमंद स्नैक्स एवं मिठाइयां प्रदान करना है। आज सहृदया फूड्स का मासिक रेवेन्यू 2 लाख रुपये से अधिक है।
इंजीनियरिंग से उद्यमिता तक का सफर
कल्याणी मूल रूप से हैदराबाद की हैं और पुणे में पली-बढ़ीं। मुंबई के ICT से पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने उच्च शिक्षा के लिए विदेश जाने का मन बनाया था, लेकिन कोरोना महामारी ने उनका प्लान बदल दिया। इस समय का उपयोग करते हुए उन्होंने महाराष्ट्र के पाबल गांव में विज्ञान आश्रम के एक प्रोजेक्ट में काम किया और ग्रामीण महिलाओं से मिली जो पारंपरिक और पौष्टिक व्यंजन बनाने में माहिर थीं। इसी अनुभव से ‘सहृदया फूड्स’ की नींव पड़ी।
विशेषज्ञता का सही इस्तेमाल
कल्याणी ने अपनी केमिकल इंजीनियरिंग की विशेषज्ञता का उपयोग खाद्य पदार्थों के पोषण को बरकरार रखने में किया। उदाहरण के लिए, मोरिंगा (सहजन) की चिक्की बनाते समय वह इसे अधिक गर्म नहीं करतीं ताकि विटामिन-C नष्ट न हो। उनके उत्पादों में मैदा, रिफाइंड शुगर या प्रिजर्वेटिव्स का इस्तेमाल नहीं होता। सहृदया फूड्स के ‘गारेलु’, ‘मोरिंगा चिक्की’ और ‘सप्तधान्य लड्डू’ अब दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु के साथ जापान और अमेरिका तक लोकप्रिय हैं।
सामाजिक बदलाव और अनूठा बिजनेस मॉडल
कल्याणी का स्टार्टअप केवल मुनाफे के लिए नहीं है। अब तक उन्होंने असम, जयपुर और महाराष्ट्र की 160 से अधिक महिलाओं को ट्रेनिंग दी है। सहृदया के किचन में काम करने वाली महिलाएं वेतन पाती हैं और कंपनी के 70% कच्चे माल की सप्लाई भी इन्हीं महिलाओं के खेतों से होती है। कल्याणी की मां लक्ष्मी भी इस काम में उनका सहयोग करती हैं, जिससे महिलाओं को घर जैसा माहौल मिलता है।
2 लाख रुपये महीने की कमाई
शुरुआत में कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा। कल्याणी ने हार नहीं मानी और कोविड केयर सेंटरों को इम्यूनिटी-बूस्टिंग स्नैक्स भेजकर अपनी पहचान बनाई। आज सहृदया फूड्स का मासिक रेवेन्यू 2 लाख रुपये से अधिक है। उन्हें ‘स्टार्टअप इंडिया’ से 10.4 लाख रुपये की ग्रांट और द बुद्धा इंस्टीट्यूट से फेलोशिप भी मिल चुकी है।
निष्कर्ष:
कल्याणी का मानना है कि भारत तेजी से बढ़ रहा है और वह अपनी पारंपरिक विरासत को वैश्विक स्तर पर पहुंचाकर इस विकास का हिस्सा बनना चाहती हैं। उनके इस सफर से साबित होता है कि सही दृष्टिकोण और मेहनत से किसी भी चुनौती को अवसर में बदला जा सकता है।