
20 जनवरी 2026 को अनुच्छेद 15(5) लागू हुए 20 साल पूरे हो गए, लेकिन अब भी उच्च शिक्षा के निजी संस्थानों में इसके तहत आरक्षित वर्ग के छात्रों को पूरा लाभ नहीं मिल पा रहा है।
अनुच्छेद 15(5), 93वें संविधान संशोधन के जरिए 2006 में पेश किया गया था। इसका उद्देश्य राज्य को यह अधिकार देना था कि वह सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्गों के लिए विशेष प्रावधान बना सके। इसके तहत निजी और सरकारी संस्थानों में अनुसूचित जाति (SC) को 15%, अनुसूचित जनजाति (ST) को 7.5% और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) को 27% आरक्षण देना अनिवार्य था।
सेंट्रल इंस्टीट्यूशन्स जैसे IIT, IIM, AIIMS और केंद्रीय विश्वविद्यालयों में यह आरक्षण लागू हो गया। मेडिकल पाठ्यक्रमों में OBC कोटा का लाभ NEET UG-PG के तहत 2021 से मिलने लगा।
लेकिन तेजी से बढ़ रहे निजी कॉलेज और विश्वविद्यालय, जिनमें इंजीनियरिंग, मेडिकल और मैनेजमेंट कोर्स शामिल हैं, अभी भी इस आरक्षण का लाभ छात्रों को पूरी तरह नहीं दे पा रहे। इसका कारण यह है कि अनुच्छेद 15(5) केवल संसद या राज्य विधानसभा द्वारा बनाए गए कानून के तहत ही पूरी तरह लागू हो सकता है। अभी तक केंद्र सरकार ने सभी निजी संस्थानों के लिए ऐसा कानून नहीं बनाया है। महाराष्ट्र और तमिलनाडु जैसे कुछ राज्यों ने अपने स्तर पर कानून बनाए हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर निजी संस्थानों में भी पूरी तरह आरक्षण लागू हो जाए, तो छात्रों को रिजर्व सीट पर एडमिशन मिल सकेगा और सरकारी कॉलेजों में प्रतिस्पर्धा की जद्दोजहद भी कम होगी।