Thursday, January 22

हिंदू-विरोधी निर्लज्ज मानसिकता उजागर, अमित मालवीय पर केस रद्द होने के बाद DMK पर BJP का तीखा हमला

नई दिल्ली / चेन्नई।
सनातन धर्म को लेकर तमिलनाडु के उपमुख्यमंत्री उदयनिधि स्टालिन द्वारा की गई आपत्तिजनक टिप्पणी से जुड़े मामले में मद्रास हाई कोर्ट से बड़ा फैसला सामने आने के बाद देश की राजनीति गरमा गई है। हाई कोर्ट द्वारा भाजपा नेता अमित मालवीय के खिलाफ दर्ज एफआईआर रद्द किए जाने के बाद भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने तमिलनाडु की सत्ताधारी डीएमके (DMK) सरकार पर तीखा हमला बोला है।

This slideshow requires JavaScript.

बीजेपी ने डीएमके पर हिंदू-विरोधी, बेशर्म और निर्लज्ज एजेंडा चलाने का आरोप लगाते हुए कहा है कि पार्टी लगातार हिंदू आस्था और सनातन परंपराओं का अपमान करती रही है।

क्या उदयनिधि स्टालिन माफी मांगेंगे? — BJP का सवा

बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता सी. आर. केसवन ने मद्रास हाई कोर्ट की मदुरै पीठ के फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर सवाल उठाया कि—

“क्या उपमुख्यमंत्री उदयनिधि स्टालिन अपनी जहरीली और विभाजनकारी हेट स्पीच के लिए माफी मांगेंगे?
क्या मुख्यमंत्री एम. के. स्टालिन इन बयानों की सार्वजनिक निंदा करेंगे?”

केसवन ने आगे कहा कि चाहे कार्तिगई दीपम जैसे पवित्र पर्वों का विरोध हो या दीपावली पर शुभकामनाएं देने से जानबूझकर परहेज, डीएमके की मानसिकता बार-बार हिंदू विरोधी रवैये को उजागर करती है।

 ‘हिंदू आस्था के अपमान को भूलेंगे, माफ करेंगे

बीजेपी प्रवक्ता ने डीएमके नेतृत्व पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि—

“जब एक पूर्व केंद्रीय मंत्री और डीएमके सांसद द्वारा यह कहा गया कि हिंदू धर्म न सिर्फ भारत बल्कि पूरी दुनिया के लिए खतरा है, तब डीएमके नेतृत्व ने एक शब्द भी नहीं कहा।
तमिलनाडु की जनता सब देख रही है। हिंदू आस्था के इस खुले अपमान को न तो लोग भूलेंगे और न ही माफ करेंगे।”

अमित मालवीय पर एफआईआर रद्द, DMK को बड़ा झटक

गौरतलब है कि मद्रास हाई कोर्ट की मदुरै बेंच ने 2023 में उदयनिधि स्टालिन द्वारा दिए गए सनातन धर्म संबंधी बयान को हेट स्पीच की श्रेणी में मानते हुए भाजपा नेता अमित मालवीय पर दर्ज एफआईआर को रद्द कर दिया।
स्टालिन ने अपने बयान में सनातन धर्म की तुलना डेंगू और मलेरिया जैसी बीमारियों से करते हुए उसे “समाप्त करने” की बात कही थी।

जब अमित मालवीय ने इस बयान को नरसंहार का संकेत बताया, तो उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी। हाई कोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि यह बयान समाज को विभाजित करने और हिंसा भड़काने की प्रवृत्ति को दर्शाता है।

कार्तिगई दीपम विवाद में भी DMK को झटक

इससे पहले भी मद्रास हाई कोर्ट की डबल बेंच ने कार्तिगई दीपम पर्व को पारंपरिक विधि से मनाने के पक्ष में फैसला सुनाते हुए डीएमके सरकार को झटका दिया था।
बीजेपी के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन ने भी अपने पहले भाषण में इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया।

तमिलनाडु चुनाव से पहले BJP को मिला बड़ा राजनीतिक हथिया

विश्लेषकों का मानना है कि आगामी तमिलनाडु विधानसभा चुनाव से पहले यह मुद्दा बीजेपी और एनडीए के लिए बड़ा राजनीतिक हथियार साबित हो सकता है।
सनातन धर्म, हिंदू आस्था और सांस्कृतिक परंपराओं से जुड़े मामलों पर अदालतों के फैसलों ने डीएमके सरकार की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।

निष्कर्ष:
मद्रास हाई कोर्ट के फैसले ने न केवल कानूनी बल्कि राजनीतिक स्तर पर भी बड़ा संदेश दिया है। अब देखना होगा कि डीएमके नेतृत्व इस पर क्या रुख अपनाता है, जबकि बीजेपी इसे जनता के बीच एक बड़े मुद्दे के रूप में ले जाने की तैयारी में है।

 

Leave a Reply