
जयपुर: राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड (RSSB) में भर्ती प्रक्रिया में बड़ा महाफर्जीवाड़ा उजागर हुआ है। बोर्ड के ही तत्कालीन उपनिदेशक और तकनीकी प्रमुख संजय माथुर ने दिल्ली की फर्म के सहयोग से ऐसे अभ्यर्थियों को नौकरी दिलाई, जिनके मूल अंक नकारात्मक (-6) थे।
जानकारी के अनुसार, 2018 की सुपरवाइजर (महिला अधिकारिता), प्रयोगशाला सहायक और कृषि पर्यवेक्षक भर्ती परीक्षाओं में OMR स्कैनिंग में छेड़छाड़ की गई। जिन अभ्यर्थियों के अंक कम थे, उनके स्कोर बढ़ाकर सरकारी नौकरी दिलाई गई। इस फर्जीवाड़े में बोर्ड के दो कर्मचारियों और स्कैनिंग फर्म के कर्मचारियों की मिलीभगत सामने आई।
एसओजी के खुलासे के अनुसार:
बोर्ड के उपनिदेशक संजय माथुर और प्रोग्रामर प्रवीण गंगवाल ने अपने रिश्तेदारों और मित्रों को सरकारी नौकरी दिलाई।
OMR स्कैनिंग का काम करने वाली नई दिल्ली स्थित फर्म राभव लिमिटेड के कर्मचारी शादान खान और विनोद कुमार गौड़ भी इस षड़यंत्र में शामिल थे।
कई अभ्यर्थियों से लाखों रुपए वसूल कर उनके अंक बढ़ाए गए।
गिरफ्तार किए गए आरोपी:
- संजय माथुर – तत्कालीन उप निदेशक (सिस्टम एनालिस्ट), RSSB
- प्रवीण गंगवाल – प्रोग्रामर, RSSB
- शादान खान – राभव लिमिटेड, नई दिल्ली
- विनोद कुमार गौड़ – राभव लिमिटेड, नई दिल्ली
- पूनम माथुर – अभ्यर्थी
एसओजी के अनुसार, यह फर्जीवाड़ा बोर्ड की भर्ती प्रक्रिया की निष्पक्षता को गंभीर रूप से प्रभावित करता है। गोपनीय शिकायत मिलने के बाद चयनित अभ्यर्थियों की OMR शीट को दोबारा स्कैन कराया गया, जिससे पूरे खेल का पर्दाफाश हुआ।
इस मामले ने राजस्थान में सरकारी भर्ती संस्थानों में पारदर्शिता और जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।