
इंदौर: भिक्षावृत्ति उन्मूलन अभियान के तहत इंदौर के सर्राफा बाजार से रेस्क्यू किए गए 60 वर्षीय मांगीलाल चौहान ने भिखारी होने से इनकार कर दिया है। प्रशासन के अनुसार, मांगीलाल के पास तीन मकान (एक तीन मंज़िला), तीन ऑटो और एक मारुति डिज़ायर कार है। मांगीलाल का कहना है कि वह ब्याज पर पैसे उधार देने का काम करते हैं और अपनी मेहनत से संपत्ति अर्जित की है। फिलहाल उन्हें उज्जैन स्थित कुष्ठ रोगियों के आश्रम में रखा गया है।
रेस्क्यू और कार्रवाई:
महिला एवं बाल विकास विभाग की टीम को सूचना मिली थी कि सर्राफा बाजार में एक कुष्ठ रोगी भीख मांग रहा है। जांच में सामने आया कि मांगीलाल संपन्न व्यक्ति हैं और वर्षों से ब्याज पर पैसे उधार देने के काम में लगे हुए थे।
मांगीलाल का बयान:
मांगीलाल ने कहा, “मैंने कभी भी भीख नहीं मांगी। मैं रोज़ाना ब्याज वसूलने सर्राफा बाजार जाता था। शनिवार की रात जब मैं पैसा वसूलने गया, तो मुझे उठा लिया गया। मैं भिखारी नहीं हूं। मैंने अपनी मेहनत और पैसे से मकान और संपत्ति बनाई है।”
पड़ोसियों और परिवार की राय:
भगत सिंह नगर में रहने वाली पड़ोसिन शांता बाई ने कहा कि मांगीलाल ने वास्तव में पिछले कुछ सालों में भीख मांगी थी। मांगीलाल के भतीजे भीम सिंह चौहान ने कहा कि मकान और ऑटो उनके परिवार के नाम पर हैं और मांगीलाल की संपत्ति के बारे में मीडिया में गलत बातें फैल रही हैं।
पुनर्वास अभियान:
इंदौर में भिक्षावृत्ति पर रोक है। प्रशासन ने पुनर्वास केंद्र बनाए हैं, जहां अब तक 5500 लोगों का पुनर्वास किया गया है, जिनमें 900 बच्चे शामिल हैं। फिलहाल एक केंद्र में 63 ऐसे लोग रह रहे हैं, जो पहले भीख मांगते थे।