
नई दिल्ली: पूर्व चीफ जस्टिस (CJI) डी.वाई. चंद्रचूड़ ने कहा है कि दोषसिद्धि से पहले जमानत (बेल) प्राप्त करना एक नागरिक का मौलिक अधिकार है। उन्होंने यह बयान छात्र नेता उमर खालिद की जमानत नामंजूर किए जाने की पृष्ठभूमि में दिया, जिससे देश में उदारवादी मूल्यों की सुरक्षा को लेकर चिंताओं को उजागर किया गया।
पूर्व सीजेआई ने विशेष रूप से कांग्रेस नेता पवन खेड़ा से जुड़ा एक महत्वपूर्ण किस्सा साझा किया। चंद्रचूड़ ने बताया कि पवन खेड़ा को गुवाहाटी में एक विमान में चढ़ते समय गिरफ्तार किया जाना था। पैरामिलिट्री फोर्सेज ने उनके विमान को घेर लिया था, लेकिन वकीलों की समय पर हस्तक्षेप से उन्हें गिरफ्तारी से बचाया गया।
चंद्रचूड़ ने कहा, “विपक्ष के नेता ने जो कहा वह असभ्य था, लेकिन हर असभ्य बात हमारे कानून के तहत अपराध नहीं होती। इस मामले में हमनें उन्हें गिरफ्तार होने से रोका। असभ्य होना और अपराध करना अलग चीजें हैं।”
उन्होंने जमानत के महत्व पर भी जोर दिया और कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामलों में बेल देने से पहले मामले की गहन समीक्षा जरूरी है।
पूर्व सीजेआई ने अपने 24 महीने के कार्यकाल के दौरान लगभग 21,000 बेल आवेदनों का निपटारा करने का उल्लेख किया और कहा कि बेल नियमों को अपवाद नहीं बल्कि सामान्य प्रक्रिया के रूप में सुनिश्चित किया जाना चाहिए। उन्होंने उमर खालिद के मामले का भी जिक्र करते हुए कहा कि किसी को भी जल्द सुनवाई का अधिकार होना चाहिए, ताकि बेल की शर्तों का दुरुपयोग न हो।
चंद्रचूड़ के इस बयान से यह स्पष्ट होता है कि न्यायपालिका का दृष्टिकोण नागरिक अधिकारों की सुरक्षा और कानून के औचित्य के बीच संतुलन बनाए रखने में है।