
नई दिल्ली: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को गाजा शांति बोर्ड का हिस्सा बनने के लिए आमंत्रित किया है। इस आमंत्रण से दोनों देशों के बीच संबंधों में नई सकारात्मक दिशा की उम्मीद बढ़ गई है। पिछले साल पीएम मोदी का अमेरिका दौरा रद्द हो गया था, जिसमें विदेश मंत्री एस. जयशंकर उनकी जगह गए थे।
व्हाइट हाउस की ओर से पीएम मोदी को भेजे गए पत्र में लिखा गया है कि भारत के प्रधानमंत्री के रूप में, उन्हें मध्य पूर्व में शांति स्थापित करने और वैश्विक संघर्षों के समाधान के लिए एक साहसिक और नए दृष्टिकोण के इस ऐतिहासिक प्रयास में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया जा रहा है।
पत्र में उल्लेख किया गया है कि 29 सितंबर 2025 को गाजा संघर्ष समाप्त करने के लिए एक 20-सूत्रीय रोडमैप की घोषणा की गई थी, जिसे अरब जगत, इज़राइल और यूरोप के प्रमुख राष्ट्राध्यक्षों सहित सभी विश्व नेताओं ने समर्थन दिया। इसके बाद 17 नवंबर को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने सर्वसम्मति से संकल्प 2803 पारित कर इस दृष्टिकोण का स्वागत किया।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की पहल से स्थापित गाजा शांति बोर्ड अब तक का सबसे प्रभावशाली और महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय मंच माना जा रहा है। इस बोर्ड में शामिल देशों का उद्देश्य स्थायी शांति के निर्माण की जिम्मेदारी निभाना है। बोर्ड का नेतृत्व ट्रंप और पूर्व ब्रिटिश प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर करेंगे।
भारत के लिए इस महत्वपूर्ण कूटनीतिक प्रक्रिया में शामिल होना अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई दिल्ली की बढ़ती अहमियत को दर्शाता है। यह संकेत है कि भारत इज़राइल और फिलिस्तीन दोनों के साथ संतुलित संबंध बनाए हुए है और मध्य पूर्व में शांति स्थापना में सक्रिय भूमिका निभा सकता है।
याद रहे कि 13 अक्टूबर 2025 को गाजा में दो साल से जारी इज़राइल-हमास युद्ध समाप्त करने के लिए ऐतिहासिक शांति समझौता हुआ था। ट्रंप की मध्यस्थता में हुए इस समझौते में दोनों पक्षों ने बंधकों और कैदियों को रिहा करने और गाजा के पुनर्निर्माण पर सहमति जताई थी।
इस समझौते के बाद शिखर सम्मेलन शर्म एल-शेख में आयोजित किया गया, जहां गाजा घोषणा पर हस्ताक्षर हुए और लंबे समय की शांति सुनिश्चित करने के लिए बोर्ड ऑफ पीस बनाने का प्रस्ताव रखा गया।