Monday, January 19

एमपी में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल, 26 आईएएस अधिकारियों के तबादले, इंदौर कांड में हटे आयुक्त को नई जिम्मेदारी

भोपाल। मध्य प्रदेश में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की दावोस यात्रा से ठीक पहले बड़ा प्रशासनिक फेरबदल किया गया है। राज्य सरकार ने एक साथ 26 आईएएस अधिकारियों के तबादले कर प्रशासनिक हलकों में हलचल मचा दी है। रविवार देर रात, अवकाश के बावजूद, मुख्य सचिव अनुराग जैन के हस्ताक्षर से तबादला आदेश जारी किए गए।

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इस फेरबदल में सबसे ज्यादा चर्चा में नाम रहा आईएएस दिलीप यादव का। इंदौर में दूषित पानी (जहरीला पानी) कांड के बाद उन्हें नगर निगम आयुक्त पद से हटाया गया था। अब महज 16 दिन बाद ही उन्हें नई जिम्मेदारी देते हुए मध्य प्रदेश पर्यटन विकास निगम (एमपीटीडीसी) का प्रबंध संचालक (एमडी) नियुक्त किया गया है। इसे प्रशासनिक स्तर पर “प्रमोशन” के तौर पर देखा जा रहा है, जिससे राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में सवाल भी खड़े हो रहे हैं।

दो दर्जन से अधिक अफसरों की जिम्मेदारियां बदलीं

सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा जारी सूची में कई वरिष्ठ और प्रभावशाली अधिकारियों के नाम शामिल हैं। 1996 बैच के आईएएस उमाकांत उमराव से खनिज साधन विभाग का प्रभार वापस ले लिया गया है, हालांकि वे पशुपालन एवं डेयरी विभाग के प्रमुख सचिव बने रहेंगे।

इसी तरह, तरुण राठी को आयुक्त, स्वास्थ्य सेवाएं, भोपाल के पद से हटाकर आयुक्त, आदिवासी विकास, भोपाल नियुक्त किया गया है। वहीं विशेष गड़पाले को सचिव, ऊर्जा विभाग के साथ-साथ एमपी पावर मैनेजमेंट कंपनी, जबलपुर और मध्य प्रदेश पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के प्रबंध संचालक की अतिरिक्त जिम्मेदारी सौंपी गई है।

वरिष्ठ अधिकारियों को अहम विभाग

इस प्रशासनिक सर्जरी में सीनियर आईएएस शिवशेखर शुक्ल, उमाकांत उमराव, शोभित जैन, जान किंग्सले सहित कई अधिकारियों को महत्वपूर्ण और रणनीतिक विभागों का दायित्व सौंपा गया है। सरकार के इस कदम को नीतिगत स्तर पर बड़े बदलाव के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।

दावोस यात्रा से पहले सख्त संदेश

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि मुख्यमंत्री की अंतरराष्ट्रीय दावोस यात्रा से पहले किया गया यह फेरबदल प्रशासन को चुस्त-दुरुस्त करने और निवेश से जुड़े विभागों को मजबूत करने की दिशा में उठाया गया कदम है। हालांकि, इंदौर कांड से जुड़े अधिकारी को नई जिम्मेदारी मिलने को लेकर विपक्ष सरकार पर सवाल भी उठा सकता है।

फिलहाल, इस व्यापक प्रशासनिक बदलाव ने मध्य प्रदेश की नौकरशाही में नई समीकरणों को जन्म दे दिया है और आने वाले दिनों में इसके राजनीतिक असर भी देखने को मिल सकते हैं।

 

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