नोएडा। सेक्टर-150 में निर्माणाधीन मॉल के बेसमेंट के लिए खोदे गए पानी भरे गड्ढे में गिरकर सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता (27) की मौत के मामले ने प्रशासनिक लापरवाही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हादसे के एक दिन बाद मृतक के पिता राजकुमार मेहता ने आरोप लगाया कि यदि समय रहते थोड़ी-सी भी मदद मिल जाती, तो उनके बेटे की जान बचाई जा सकती थी।
राजकुमार मेहता ने बताया कि उनका बेटा रात में जिंदगी और मौत से जूझता रहा। वह मोबाइल की फ्लैश लाइट जलाकर मदद की गुहार लगाता रहा, लेकिन मौके पर मौजूद अधिकांश लोग तमाशबीन बने रहे और वीडियो बनाते रहे। उन्होंने आरोप लगाया कि मौके पर न तो बचाव के पर्याप्त संसाधन थे और न ही प्रशिक्षित कर्मी।
देर से शुरू हुआ रेस्क्यू
राजकुमार मेहता के अनुसार, हादसा शुक्रवार देर रात करीब 12 बजे हुआ, जबकि बचाव कार्य सुबह करीब छह बजे शुरू किया गया। इसके करीब एक घंटे बाद युवराज का शव बरामद किया गया। उन्होंने कहा कि मौके पर मौजूद अधिकारी सक्षम नहीं थे। न तो नाव उपलब्ध थी, न ही कोई तैराक। रात ढाई बजे के बाद युवराज के मोबाइल की रोशनी भी बंद हो गई थी।
उन्होंने इस पूरे मामले को नोएडा अथॉरिटी की घोर लापरवाही बताते हुए दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
कंपनी अधिकारियों पर केस दर्ज
इस मामले में पुलिस ने रियल एस्टेट कंपनी एमएजे विशटाउन प्लानर लिमिटेड और लोट्स ग्रैंड कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड के अधिकारियों के खिलाफ गैर-इरादतन हत्या का मुकदमा दर्ज किया है। पुलिस के अनुसार, युवराज की कार नाले की टूटी बाउंड्री वॉल को पार करते हुए पानी से भरे गड्ढे में जा गिरी थी।
युवराज करीब ढाई घंटे तक गड्ढे में फंसे रहे और मदद के लिए पुकारते रहे, लेकिन उन्हें सुरक्षित बाहर नहीं निकाला जा सका।
चश्मदीद का दावा
घटना के चश्मदीद गढ़ी समसपुर गांव निवासी मुनेद्र ने बताया कि जब वह मौके पर पहुंचे, तो पुलिस वहां मौजूद थी। एक युवक पानी में मोबाइल की लाइट जलाकर मदद के लिए चिल्ला रहा था, लेकिन कोई भी पानी में उतरने को तैयार नहीं था। उन्होंने दावा किया कि पुलिस ने पानी ठंडा होने और अंदर सरिया होने का हवाला देकर उतरने से मना कर दिया था। इसके बाद उन्होंने खुद कमर में रस्सी बांधकर पानी में उतरकर तलाश की।
कार्रवाई शुरू
हादसे के बाद नोएडा ट्रैफिक सेल विभाग के जूनियर इंजीनियर नवीन कुमार को बर्खास्त कर दिया गया है। नोएडा अथॉरिटी के सीईओ ने लोटस बिल्डर के आवंटन और निर्माण कार्य की विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। साथ ही सेक्टर-150 क्षेत्र में ट्रैफिक और सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े कर्मचारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं।
दो दिन बाद हुई बैरिकेडिंग
रविवार को अधिकारियों ने घटनास्थल पर बैरिकेडिंग कराई, हालांकि स्थानीय लोगों ने इसे नाकाफी बताते हुए विरोध जताया। नोएडा पुलिस के जॉइंट कमिश्नर डॉ. राजीव मिश्रा ने कहा कि सूचना मिलते ही पुलिस और फायर विभाग की टीमें मौके पर पहुंच गई थीं। सीढ़ी, रस्सी और सर्च लाइट की मदद से बचाव कार्य किया गया, लेकिन उस समय जीरो विजिबिलिटी थी। मामले की जांच जारी है।