
वॉशिंगटन/तेहरान।
अमेरिका ने मिडिल ईस्ट में तनाव बढ़ने के बीच अपने अब्राहम लिंकन कैरियर स्ट्राइक ग्रुप को भेज दिया है। यह समूह एक हफ्ते में क्षेत्र में पहुंच जाएगा। इसके CVW-9 कैरियर एयर विंग में आठ स्क्वाड्रन शामिल हैं, जिनमें F-35C लाइटनिंग II, F/A-18E/F सुपर हॉर्नेट, EA-18G ग्राउलर, E-2D हॉकआई, CMV-22B ऑस्प्रे और MH-60R/S सी हॉक जैसे उन्नत लड़ाकू विमान शामिल हैं।
साथ ही, USS मोबाइल बे जैसी टिकोनडेरोगा क्लास गाइडेड-मिसाइल क्रूजर और डिस्ट्रॉयर स्क्वाड्रन 21 के अर्ले बर्क क्लास गाइडेड-मिसाइल डिस्ट्रॉयर भी मिडिल ईस्ट की ओर बढ़ रहे हैं। ये जहाज ईरान पर संभावित हमले या जवाबी कार्रवाई के दौरान अमेरिकी ठिकानों की सुरक्षा में इस्तेमाल हो सकते हैं।
रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिकी एयरफोर्स और नौसेना के कई अन्य कार्गो और लड़ाकू विमान भी इसी क्षेत्र की ओर बढ़ रहे हैं। ऑनलाइन फ्लाइट ट्रैकिंग में देखा गया कि कम से कम चार रॉयल एयर फोर्स यूरोफाइटर टाइफून और एक एयरबस KC-2 वॉयजर एरियल रिफ्यूलिंग जेट बहरीन की तरफ जा रहे हैं। इसके अलावा, फ्रांस और जर्मनी के भी विमान इलाके में सक्रिय हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिका के पास ईरान पर “सर्जिकल स्ट्राइक” या उच्च रैंकिंग नेताओं और न्यूक्लियर ठिकानों पर हमला करने के विकल्प मौजूद हैं। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि अमेरिका बड़े, लगातार चलने वाले ऑपरेशन के लिए पूरी तरह तैयार है या नहीं। अगर हमला किया भी जाता है, तो उसके बाद स्थिति को संभालने की क्षमता पर भी सवाल हैं।
डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में ईरान पर हमला करने के संकेत दिए थे, लेकिन 800 प्रदर्शनकारियों की फांसी रोके जाने के बाद हमले को फिलहाल स्थगित कर दिया गया। रिपोर्ट्स के अनुसार, इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने भी अमेरिका से ईरान पर हमला न करने का आग्रह किया है।
अंतरराष्ट्रीय निगरानी एजेंसियों और मिलिट्री विश्लेषकों के अनुसार, मिडिल ईस्ट में अमेरिका का यह विशालकाय बेड़ा युद्ध की तैयारी को दर्शाता है, लेकिन किसी हमले का समय और पैमाना अभी तय नहीं है।