Saturday, January 17

ईरान के खिलाफ बलूचिस्तान की जमीन के इस्तेमाल पर बलूचों का अल्टीमेटम, पाकिस्तान को बताया ‘अवैध कब्जाधारी’

बलूचिस्तान के स्वतंत्रता समर्थक नेताओं ने पाकिस्तान के खिलाफ कड़ा रुख अपनाते हुए ईरान के विरुद्ध किसी भी सैन्य या रणनीतिक कार्रवाई के लिए बलूचिस्तान की जमीन, हवाई क्षेत्र और समुद्री सीमा के इस्तेमाल पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने का ऐलान किया है। बलूच नेता मीर यार बलूच की ओर से जारी बयान में पाकिस्तान को साफ अल्टीमेटम देते हुए कहा गया है कि बलूचिस्तान पाकिस्तान की संपत्ति नहीं है और उसे किसी तीसरे देश के खिलाफ इस्तेमाल करने का कोई अधिकार इस्लामाबाद को नहीं है।

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बलूच नेता ने पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के हालिया बयान को “अति आत्मविश्वासी और भ्रामक” बताते हुए कहा कि पाकिस्तान बार-बार उन क्षेत्रों पर अपना दावा जताता है, जो उसके नहीं हैं। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के पास न तो कोई वैध क्षेत्रीय जलक्षेत्र है, न ही हवाई क्षेत्र या रणनीतिक गहराई, जिसे वह ईरान के खिलाफ अभियानों के लिए अमेरिका या किसी अन्य देश को सौंप सके।

बयान में कहा गया है कि पाकिस्तान का एकमात्र समुद्री रास्ता और लंबी तटरेखा पूरी तरह से कब्जे वाले बलूचिस्तान और सिंध में स्थित है। ये क्षेत्र ऐतिहासिक रूप से बलूच और सिंधी राष्ट्रों के हैं, जिन पर पाकिस्तान ने दशकों से अवैध कब्जा कर रखा है और संसाधनों का शोषण किया है। बलूच नेताओं का दावा है कि वास्तविक पाकिस्तान—यानी पंजाब प्रांत—चारों ओर से स्थल-आवृत है और समुद्र तक उसकी कोई प्राकृतिक पहुंच नहीं है। बलूचिस्तान की एक हजार किलोमीटर से अधिक की तटरेखा और सिंध के जलक्षेत्र के बिना पाकिस्तान की नौसैनिक क्षमता का कोई महत्व नहीं बचता।

बलूच नेतृत्व ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय, विशेषकर अमेरिका, इजरायल और लोकतांत्रिक देशों से अपील की है कि वे जमीनी हकीकत को समझें और क्षेत्रीय स्थिरता के लिए बलूच, सिंधी, अहवाजी, कुर्द और पश्तून जैसे वास्तविक हितधारकों को शामिल करें। बयान में कहा गया है कि ये राष्ट्र लंबे समय से पाकिस्तान और ईरान में दमनकारी शासनों के खिलाफ आजादी, लोकतंत्र और शांति की मांग कर रहे हैं।

अंत में बलूच नेताओं ने दोहराया कि जिन इलाकों को पाकिस्तान बचाने या किसी अन्य देश को देने का दावा करता है, वे पाकिस्तानी नहीं हैं। अंतरराष्ट्रीय समुदाय को चाहिए कि वह इस सच्चाई को स्वीकार करे और क्षेत्रीय शांति व स्वतंत्रता के लिए संघर्ष कर रहे दबे-कुचले राष्ट्रों से सीधे संवाद स्थापित करे।

 

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