Saturday, January 17

म्यूचुअल फंड निवेशकों के लिए बड़ी राहत: SEBI ने लाया BER फॉर्मूला, जानें कैसे होगा फायदा

नई दिल्ली: म्यूचुअल फंड में निवेश करने वालों के लिए बड़ा सुखद समाचार है। बाजार नियामक SEBI ने म्यूचुअल फंड नियमों में बड़े बदलावों की घोषणा की है। अब फंड हाउस को बेस एक्सपेंस रेशियो (BER) के तहत खर्चों को अलग-अलग दिखाना होगा। इससे निवेशकों को स्पष्ट जानकारी मिलेगी कि उनका पैसा फंड मैनेजमेंट फीस और सरकारी टैक्स (GST और STT) में कितना खर्च हो रहा है।

This slideshow requires JavaScript.

पहले फंड हाउस सभी खर्चों को टोटल एक्सपेंस रेशियो (TER) में एक साथ दिखाते थे। नए नियम 1 अप्रैल 2026 से लागू होंगे। SEBI ने यह भी स्पष्ट किया है कि म्यूचुअल फंड स्कीम के सभी खर्च सीधे स्कीम से ही दिए जाएँ और उनकी एक तय सीमा होगी। अगर खर्च सीमा से अधिक हुआ, तो अतिरिक्त पैसा निवेशकों की जेब से नहीं बल्कि AMC (Asset Management Company) को खुद वहन करना होगा। इसका मतलब है कि अब निवेशकों का पैसा ज्यादा सुरक्षित रहेगा।

ब्रोकरेज चार्ज में कटौती:
SEBI ने शेयरों की खरीद-फरोख्त पर लगने वाले ब्रोकरेज चार्ज को भी घटा दिया है। कैश मार्केट के लिए इसे 0.12% से घटाकर 0.06% और डेरिवेटिव्स के लिए 0.05% से घटाकर 0.02% कर दिया गया है। इसके अलावा, साल 2018 में शुरू किया गया 0.05% का अतिरिक्त एग्जिट लोड भी अब समाप्त कर दिया गया है।

बारबार डॉक्यूमेंट देने की जरूरत नहीं:
SEBI ने ग्राहकों के लिए खाता खोलने और KYC प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए नया प्रस्ताव पेश किया है। अब ग्राहकों द्वारा दी जाने वाली अतिरिक्त जानकारी KRA (KYC Registration Agencies) के पास एक जगह सेंट्रलाइज की जाएगी। इसका फायदा यह होगा कि निवेशकों को अलग-अलग ब्रोकर या संस्थानों के पास जाकर बार-बार वही जानकारी देने की जरूरत नहीं होगी।

इसके अलावा, आधार से लिंक मोबाइल नंबर और अपडेटेड PAN-आधार होने पर अलग से वेरिफिकेशन या सबूत की आवश्यकता नहीं होगी। वहीं, भारत में 182 दिनों से अधिक समय से रहने वाले OCI कार्ड धारकों के लिए विदेशी एड्रेस देना अनिवार्य नहीं होगा।

विदेशी निवेशकों के लिए नियम आसान:
विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) को आकर्षित करने के लिए SEBI ने ‘SWAGAT-FI’ सिस्टम के तहत नियम सरल कर दिए हैं। अब विदेशी निवेशकों को अलग-अलग श्रेणियों में रजिस्ट्रेशन के लिए अलग-अलग फॉर्म नहीं भरने होंगे। साथ ही, रजिस्ट्रेशन और KYC की वैधता को 5 साल से बढ़ाकर 10 साल कर दिया गया है। यह बदलाव जून 2026 से लागू होगा।

इस बदलाव के बाद निवेशकों को न केवल म्यूचुअल फंड खर्चों का स्पष्ट पता चलेगा, बल्कि पैसे की बचत और प्रक्रिया में सरलता भी मिलेगी।

 

Leave a Reply