
नई दिल्ली: गुरुग्राम की रहने वाली डॉ. आयुषी जैन गुप्ता ने MBBS और MBA की डिग्री हासिल करने के बाद डॉक्टर बनने के बजाय उद्यमिता की राह चुनी। प्रकृति के प्रति लगाव और रोजमर्रा की समस्याओं के समाधान की तलाश में उन्होंने साल 2022 में गुरुग्राम बेस्ड स्टार्टअप ‘नोरा’ (NORA) की नींव रखी। यह स्टार्टअप टिकाऊ, हल्के और सुंदर आउटडोर फर्नीचर और प्लांटर पॉट्स (गमले) बनाने में माहिर है।
आइडिया कैसे आया:
डॉ. आयुषी ने चीन के शेनयांग मेडिकल कॉलेज से MBBS की डिग्री और बाद में आईआईपीएम से MBA पूरा किया। प्रकृति प्रेमी होने के नाते उन्होंने देखा कि बाजार में उपलब्ध प्लांटर या तो बहुत भारी हैं या धूप में जल्दी चटक जाते हैं। इसे अवसर में बदलते हुए उन्होंने अपने पति अनुराग गुप्ता के साथ पहले से चल रहे ‘RFM ऑटोमोटिव्स’ के अनुभव का फायदा उठाकर NORA लॉन्च किया। उनका उद्देश्य ऐसे उत्पाद बनाना था जो आधुनिक घरों की शोभा बढ़ाएं और लंबे समय तक टिकाऊ रहें।
मिथक को तोड़ा:
डॉ. आयुषी के उत्पादों की सबसे बड़ी खासियत उनकी सस्टेनेबिलिटी और मजबूती है। उन्होंने यह मिथक तोड़ दिया कि इको–फ्रेंडली प्रोडक्ट टिकाऊ नहीं होते। उनके गमले हाई–ग्रेड पॉलीमर से बने हैं, जो रीसाइक्लेबल, यूवी–रेसिस्टेंट और वेदर–प्रूफ हैं। उनके आउटडोर फर्नीचर में इन-बिल्ट LED लाइटिंग जैसे इनोवेटिव फीचर्स भी दिए गए हैं, जिससे गार्डन स्पेस को प्रीमियम लुक मिलता है। आयुषी का वादा है कि उनके किसी भी उत्पाद को कभी लैंडफिल में नहीं फेंका जाएगा।
तेजी से बढ़ा रेवेन्यू:
शुरुआत में NORA का मासिक रेवेन्यू 3 लाख रुपये था। वित्त वर्ष 2024-25 तक यह बढ़कर 10 लाख रुपये मासिक (सालाना 1.2 करोड़ रुपये) हो गया। आयुषी ने B2B और D2C दोनों चैनलों को सफलतापूर्वक साधा है। उनके प्रोडक्ट अमेज़न और पेपरफ्राई जैसे प्रमुख प्लेटफॉर्म्स पर उपलब्ध हैं। विशेष रूप से Gen Z युवाओं के बीच उनके सुंदर डिज़ाइन काफी लोकप्रिय हैं। डॉ. आयुषी का लक्ष्य है कि साल 2026 तक मासिक रेवेन्यू 25 लाख रुपये तक पहुंच जाए।
आगे की योजना:
डॉ. आयुषी का उद्देश्य NORA को सिर्फ बिजनेस नहीं, बल्कि ‘लाइफस्टाइल ब्रांड’ बनाना है। इस उद्देश्य को मजबूत करने के लिए उन्होंने गोल्डमैन सैक्स 10,000 वीमेन और ISB के ग्रोथ प्रोग्राम्स में हिस्सा लिया। भविष्य में NORA का विस्तार बच्चों के फर्नीचर और स्कूल के खिलौनों तक करने की योजना है, जिसमें मुख्य फोकस कार्यक्षमता, सुंदरता और पर्यावरण सुरक्षा पर रहेगा।
डॉ. आयुषी जैन गुप्ता की यह कहानी साबित करती है कि अगर जुनून और सही दिशा हो तो डॉक्टरी छोड़कर भी उद्यमिता में सफलता हासिल की जा सकती है।