
समाज में आज भी लड़का और लड़की के बीच भेदभाव व्यापक रूप से मौजूद है। स्थिति इतनी गंभीर है कि कई बार बेटी को जन्म देने वाली महिला के साथ दुर्व्यवहार तक किया जाता है। हाल ही में ऐसा ही एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसमें एक महिला को सिर्फ इसलिए अपमान और गुस्से का सामना करना पड़ा क्योंकि उसने बेटी को जन्म दिया।
आमतौर पर जब कोई महिला मां बनती है, यह पल पूरे परिवार के लिए खुशी और उत्सव का होता है। रिश्तेदार बधाइयां देते हैं और नवजात शिशु को दुलारते हैं। लेकिन सोचिए, अगर किसी महिला के मां बनने पर उसे बधाइयों के बजाय गालियां सुननी पड़ें। यह सुनने में भले ही अजीब लगे, लेकिन हकीकत में ऐसा ही हुआ।
इस मामले की जानकारी प्रसिद्ध गायनेकोलॉजिस्ट डॉ. समरा मसूद ने अपने इंस्टाग्राम पेज पर वीडियो के माध्यम से साझा की। उन्होंने कहा कि बेटी पैदा होने पर किसी भी महिला को गालियां देना बिल्कुल गलत है और किसी का भी ऐसा अधिकार नहीं है।
डॉ. मसूद ने आगे कहा कि समाज पहले ही लड़का और लड़की के बीच भेदभाव करता है, और महिलाओं को सिर्फ लड़का पैदा करने के लिए मानसिक उत्पीड़न और टॉर्चर सहना पड़ता है। इस मामले में महिला की पहली डिलीवरी पर भी उसके परिवार ने नाराजगी जताई और उसे गालियां दीं। यह देखकर मैं खुद हैरान रह गई कि आज भी लोग इतना अमानवीय व्यवहार कर रहे हैं।
डॉ. मसूद ने यह भी सवाल उठाया कि एक औरत दूसरी औरत को कैसे गालियां दे सकती है। नौ महीने तक बच्चा अपने पेट में पालने वाली महिला को उसकी पहली डिलीवरी पर अपमानित करना न केवल क्रूर है, बल्कि पूरी तरह अस्वीकार्य है। उन्होंने कहा, “कृपया औरतों की इज़्ज़त कीजिए। उनके अधिकार और सम्मान की रक्षा करना समाज की जिम्मेदारी है।”
डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई जानकारी पूरी तरह इंस्टाग्राम वीडियो पर आधारित है। नवभारत टाइम्स इसकी सत्यता की जिम्मेदारी नहीं लेता।