
नई दिल्ली। सर्दियों के मौसम में गुड़ की चाय न सिर्फ़ स्वाद में बेहतरीन होती है, बल्कि सेहत के लिए भी बेहद लाभकारी मानी जाती है। यह शरीर को अंदर से गर्म रखने के साथ पाचन को भी दुरुस्त करती है। हालांकि, अधिकतर लोग इसे घर पर बनाने से कतराते हैं, क्योंकि गुड़ डालते ही दूध फटने का डर बना रहता है। इसी परेशानी का आसान और भरोसेमंद समाधान सामने आया है, जो मशहूर यूट्यूब चैनल ‘कविता की रसोई’ ने साझा किया है।
कविता के अनुसार, गुड़ की चाय बनाने में सामग्री नहीं बल्कि सही समय और सही क्रम सबसे अहम होता है। अगर दूध और गुड़ को सही वक्त पर डाला जाए, तो चाय न सिर्फ़ फटने से बचेगी, बल्कि एकदम गाढ़ी, मलाईदार और कड़क बनेगी।
पानी और मसालों से करें शुरुआत
गुड़ की चाय बनाने की शुरुआत हमेशा पानी गर्म करने से करनी चाहिए। हल्का गर्म होते ही इसमें कूटा हुआ अदरक, इलायची या अपनी पसंद के अन्य मसाले डालें। मसालों को तब तक उबालें जब तक पानी का रंग बदलने लगे और खुशबू आने लगे। इससे चाय का फ्लेवर गहरा होता है।
चायपत्ती को दें पूरा उबाल
इसके बाद पानी में चायपत्ती डालें और अच्छी तरह उबालें। कविता बताती हैं कि जब तक चायपत्ती का पूरा अर्क न उतर जाए, तब तक अगला स्टेप नहीं अपनाना चाहिए। चाय की कड़कता इसी चरण पर निर्भर करती है।
दूध पहले, गुड़ बाद में
जब मसालों और चायपत्ती का काढ़ा तैयार हो जाए, तब इसमें दूध डालें। दूध डालने के बाद चाय को धीमी आंच पर अच्छी तरह पकने दें। जब ऊपर मलाई जैसी परत दिखने लगे, तो समझ लें कि चाय पक चुकी है।
गुड़ डालने का ‘गोल्डन रूल’
इस रेसिपी का सबसे अहम नियम है—गुड़ कभी भी उबलती चाय में न डालें। जब दूध वाली चाय पूरी तरह पक जाए, तभी अंत में गुड़ या गुड़ का पाउडर डालें। एक बार चम्मच से मिलाएं और तुरंत गैस बंद कर दें।
गैस बंद करना है जरूरी
गुड़ डालने के बाद अगर चाय को दोबारा उबाला गया, तो दूध फट सकता है। चाय की गर्मी ही गुड़ को घोलने के लिए पर्याप्त होती है।
छानकर करें परोसने की तैयारी
गैस बंद करने के बाद चाय को 10–20 सेकंड तक ढककर रखें, ताकि गुड़ अच्छी तरह घुल जाए। इसके बाद चाय छान लें। इस तरीके से बनी गुड़ की चाय स्वाद में लाजवाब, रंग में गाढ़ी और पूरी तरह सुरक्षित रहती है।