
नई दिल्ली: किसी भी कपल के लिए मिसकैरेज का दर्द सहना आसान नहीं होता। जब यह दर्द बार-बार दोहराए, तो यह मानसिक और शारीरिक दोनों तरह के तनाव का कारण बन सकता है। ऐसे में कई सवाल मन में उठते हैं – आखिर बार-बार मिसकैरेज क्यों हो रहा है, अगली प्रेग्नेंसी कब सुरक्षित होगी और कैसे इसे प्लान किया जाए?
क्लाउडनाइन ग्रुप ऑफ हॉस्पिटल्स, पंजाबी बाग, नई दिल्ली की सीनियर कंसल्टेंट, डॉ. साधना सिंघल विश्नोई बताती हैं कि बार-बार मिसकैरेज के पीछे कई कारण हो सकते हैं।
- क्रोमोसोमल समस्या सबसे आम वजह
डॉक्टर साधना के अनुसार, बार-बार गर्भपात का सबसे बड़ा कारण भ्रूण के क्रोमोसोम्स में गड़बड़ी है। जब भ्रूण का विकास सही ढंग से नहीं होता, तो शरीर स्वाभाविक रूप से गर्भ को आगे बढ़ाने में सक्षम नहीं होता। - हार्मोन असंतुलन
थायरॉइड की समस्या, पीसीओएस (PCOS) या प्रोजेस्टेरोन हार्मोन की कमी भी बार-बार मिसकैरेज का कारण बन सकती है। ये हार्मोन गर्भ को टिकाए रखने में अहम भूमिका निभाते हैं। - बच्चेदानी से जुड़ी समस्याएं
यूट्रस की बनावट में असामान्यता, फाइब्रॉइड्स, पॉलीप्स या सर्वाइकल वीकनेस (कमजोर गर्भाशय ग्रीवा) गर्भ ठहरने में बाधा डाल सकते हैं। इसके अलावा कुछ महिलाओं में इम्यून सिस्टम भ्रूण को ‘फॉरेन बॉडी’ समझकर नुकसान पहुंचा सकता है। एपीएलए सिंड्रोम (APLA) जैसी स्थितियां भी गर्भपात का कारण बन सकती हैं। - इंफेक्शन और लाइफस्टाइल फैक्टर
कुछ अनदेखे इंफेक्शन जैसे टॉक्सोप्लाज़्मोसिस, रूबेला या यूरीन/यूटेराइन इंफेक्शन भी बार-बार मिसकैरेज से जुड़े हो सकते हैं। इसके साथ ही धूम्रपान, शराब, अत्यधिक कैफीन, मोटापा, तनाव और नींद की कमी जैसी लाइफस्टाइल आदतें भी गर्भधारण को प्रभावित कर सकती हैं। - अगली प्रेग्नेंसी कब प्लान करें?
डॉ. साधना बताती हैं कि मिसकैरेज के बाद 2 से 3 नॉर्मल पीरियड साइकल इंतजार करने की सलाह दी जाती है। इससे शरीर पूरी तरह रिकवर कर सके और यूट्रस दोबारा स्वस्थ हो जाए। - मानसिक रूप से तैयार होना जरूरी
गर्भपात केवल शारीरिक ही नहीं, बल्कि मानसिक रूप से भी असर डालता है। इसलिए अगली प्रेग्नेंसी से पहले कपल्स को भावनात्मक रूप से तैयार होना बेहद जरूरी है। जरूरत पड़ने पर काउंसलिंग लेने में भी हिचकिचाना नहीं चाहिए।