Friday, January 16

डायबिटीज और एसिडिटी की आम दवाएं बनीं खतरे की वजह, महिला का विटामिन B12 200 से नीचे गिरा — हर भारतीय के लिए जरूरी चेतावनी

नई दिल्ली।
बीमारियों के इलाज में दवाओं की भूमिका अहम होती है, लेकिन बिना नियमित डॉक्टर फॉलोअप के लंबे समय तक दवाएं लेना गंभीर स्वास्थ्य जोखिम पैदा कर सकता है। डायबिटीज और गैस-एसिडिटी के इलाज में आमतौर पर दी जाने वाली मेटफॉर्मिन और ओमेप्राजोल जैसी दवाओं का ऐसा ही एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसमें 68 वर्षीय महिला का विटामिन B12 स्तर 200 pg/mL से काफी नीचे गिर गया।

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विशेषज्ञों के अनुसार यह स्थिति भारत जैसे देश में बेहद चिंताजनक है, जहां बड़ी संख्या में लोग सालों तक दवाएं लेते रहते हैं, लेकिन नियमित जांच और डॉक्टर से परामर्श को नजरअंदाज कर देते हैं।

क्या है पूरा मामला

केस स्टडी के मुताबिक महिला पिछले 6 वर्षों से टाइप-2 डायबिटीज के लिए दिन में दो बार 1000 mg मेटफॉर्मिन और पिछले 4 वर्षों से गैस्ट्रोइसोफेगियल रिफ्लक्स डिजीज (GERD) के लिए रोजाना 20 mg ओमेप्राजोल ले रही थी। लंबे समय तक इन दवाओं के सेवन के कारण उसके शरीर में विटामिन B12 का अवशोषण प्रभावित हुआ और गंभीर कमी विकसित हो गई।

B12 की कमी से दिखे गंभीर लक्षण

महिला को लगातार थकान, चक्कर आना, हाथ-पैरों में सुन्नपन और झनझनाहट की शिकायत थी। सीढ़ियां चढ़ने में कठिनाई होने लगी और याददाश्त कमजोर पड़ने लगी। जांच में शरीर में पीलापन, पैरों में डिस्टल पैरेस्थिसिया और चलने में अस्थिरता पाई गई।

लैब रिपोर्ट में महिला का हीमोग्लोबिन 10.8 g/dL, मीन कॉर्पसकुलर वॉल्यूम 108 fL और सीरम विटामिन B12 का स्तर मात्र 160 pg/mL पाया गया, जो स्पष्ट रूप से खतरनाक श्रेणी में आता है।

क्यों नुकसान पहुंचाती हैं ये दवाएं

अमेजन बेस्टसेलिंग लेखक और कंसल्टेंट फार्मासिस्ट एरिक क्रिश्चियनसन (BCGP, BCPS) के अनुसार, मेटफॉर्मिन का लंबे समय तक सेवन आंतों के उस हिस्से (इलियम) में B12 के अवशोषण को प्रभावित करता है, जहां यह विटामिन शरीर में जाता है। वहीं ओमेप्राजोल जैसी पीपीआई दवाएं पेट का एसिड कम कर देती हैं, जबकि डाइटरी प्रोटीन से विटामिन B12 को रिलीज करने के लिए पेट का एसिड जरूरी होता है।

सप्लीमेंट से आया सुधार

डॉक्टरों ने महिला को रोजाना 1000 माइक्रोग्राम विटामिन B12 सप्लीमेंट देना शुरू किया और दवाओं की समीक्षा की। कुछ ही समय में उसकी हालत में स्पष्ट सुधार देखने को मिला। साथ ही पीपीआई दवाओं के लंबे उपयोग के फायदे-नुकसान समझाए गए और नियमित फॉलोअप की सख्त सलाह दी गई।

हर भारतीय के लिए जरूरी सबक

भारत में गैस, दर्द और डायबिटीज की दवाएं बिना डॉक्टर की निगरानी के लंबे समय तक लेना आम बात है। यह मामला चेतावनी देता है कि दवाएं जितनी जरूरी हैं, उतना ही जरूरी है नियमित जांच, सही डोज और समय-समय पर डॉक्टर से परामर्श। थोड़ी सी लापरवाही गंभीर पोषण-कमी और न्यूरोलॉजिकल समस्याओं में बदल सकती है।

डिस्क्लेमर: यह समाचार केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से प्रकाशित किया गया है। किसी भी दवा को शुरू करने, बंद करने या बदलने से पहले अपने डॉक्टर की सलाह अवश्य लें।

 

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