
मध्य प्रदेश के अशोक नगर जिले के छोटे गांव इकोडिया से निकलकर मोना डांगी ने साबित कर दिया कि अगर हौसला मजबूत हो तो कोई भी बाधा बड़ी नहीं होती। उस गांव में आम तौर पर लड़कियों की पढ़ाई को प्राथमिकता नहीं दी जाती थी, और 12वीं या ग्रेजुएशन के बाद उन्हें घर से शादी के लिए तैयार किया जाता था। लेकिन मोना ने अपने सपने और परिवार के सहयोग से इस सोच को चुनौती दी।
सरकारी स्कूल से लेकर डिप्टी कलेक्टर तक का सफर
मोना ने 12वीं की पढ़ाई मुंगावली के सरकारी स्कूल से पूरी की। इसके बाद इंदौर के महारानी लक्ष्मीबाई कन्या कॉलेज से BSc की डिग्री हासिल की और Political Science में MA किया। कॉलेज के पहले साल से ही उन्होंने MPPSC की तैयारी शुरू कर दी थी।
आर्थिक चुनौतियों को बनाया ताकत
मोना के पिता छोटे किसान थे और परिवार में चार भाई-बहन हैं। पैसों की कमी के बावजूद मोना ने पढ़ाई में कभी हार नहीं मानी। तैयारी के दौरान खर्च बढ़ने पर उन्होंने ट्यूशन पढ़ाकर अपने खर्च निकालने शुरू कर दिए। MPPSC 2022 में उन्होंने रैंक-34 हासिल कर वाणिज्य कर निरीक्षक (CTI) की पोस्ट पाई।
दूसरी कोशिश में रैंक-12, बनीं डिप्टी कलेक्टर
मोना ने नौकरी के बाद भी अपने सपने को पूरा करने की ठानी और MPPSC 2023 में रैंक-12 लाकर डिप्टी कलेक्टर बनीं। उनकी सफलता ने न केवल उनके गांव में लड़कियों की शिक्षा के महत्व को उजागर किया, बल्कि समाज की सोच बदलने में भी मदद की।
मोना अब अपने अनुभव और हौसले के जरिए अन्य लड़कियों को पढ़ाई के लिए प्रेरित कर रही हैं और उन्हें अपने सपनों को पूरा करने की राह दिखा रही हैं।