
गाजियाबाद: घर बैठे 10 मिनट में सामान पहुंचाने की होड़ अब डिलिवरी बॉय के लिए राहत में बदलती नजर आ रही है। केंद्र सरकार के हस्तक्षेप के बाद ई-कॉमर्स कंपनी ब्लिंकिट ने अपनी ‘10 मिनट डिलिवरी’ टैगलाइन हटा दी है। इसके साथ ही अन्य कंपनियां भी समय-सीमा को लेकर अपने नियमों पर पुनर्विचार कर रही हैं। इस फैसले से गाजियाबाद के डिलिवरी बॉय खासे संतुष्ट दिखाई दे रहे हैं।
जोखिम और तनाव होगा कम
डिलिवरी बॉय अंकित मलिक और योगेश का कहना है कि तय समय का दबाव कम होने से सड़क हादसों का खतरा घटेगा और मानसिक तनाव भी कम होगा।
उन्होंने बताया कि पहले 10 मिनट में डिलिवरी पूरी करने के लिए तेज रफ्तार में वाहन चलाना मजबूरी बन जाता था। रेड लाइट जंप करना या गलत दिशा में बाइक दौड़ाना आम हो गया था। एक मिनट की देरी पर भी ग्राहक ऑर्डर कैंसल कर देता था, जिससे पेट्रोल खर्च के साथ-साथ पेनल्टी भी भुगतनी पड़ती थी।
एक ऑर्डर के लिए जिंदगी दांव पर नहीं
चिरंजीवी विहार निवासी डिलिवरी बॉय राकेश वर्मा ने बताया कि बेहतर कमाई के लिए ज्यादातर डिलिवरी बॉय एक साथ कई कंपनियों से जुड़े रहते हैं। ऐसे में एक समय में कई ऑर्डर संभालने पड़ते हैं।
उन्होंने कहा, “टारगेट पूरा करने के चक्कर में हम अपनी जान जोखिम में डाल देते थे, लेकिन अब समय की बाध्यता खत्म होने से राहत मिली है। आखिर एक ऑर्डर के लिए जिंदगी दांव पर नहीं लगाई जा सकती।”
ग्राहकों से समझदारी की अपील
इंदिरापुरम निवासी सीमा और वसुंधरा क्षेत्र की नेहा देशवाल का कहना है कि ग्राहकों को भी समझदारी दिखानी चाहिए।
उन्होंने कहा कि जिस सामान को हम खुद सर्दी-गर्मी या बारिश में तुरंत लाने नहीं जा सकते, वह ऑनलाइन मंगवाया जाता है, ऐसे में कुछ देर होना स्वाभाविक है। बिना वजह ऑर्डर कैंसल करना डिलिवरी बॉय के लिए नुकसानदायक साबित होता है।
सुरक्षा पहले, रफ्तार बाद में
डिलिवरी बॉय का मानना है कि समय के दबाव से आजादी मिलने से न सिर्फ उनकी सुरक्षा बढ़ेगी, बल्कि काम की गुणवत्ता और संतुलन भी बेहतर होगा।