
भोपाल। मुगल बादशाह बाबर पर किताब लिखने वाले लेखक आभास मालदाहियार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को खुला पत्र लिखकर आरोप लगाया है कि उनकी किताब ‘Babur: The Quest for Hindustan’ को बिना पढ़े ही निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि एक मीडिया रिपोर्ट के कारण गलतफहमी फैल गई, जिससे उनके भोपाल लिटरेचर फेस्टिवल 2026 में सेशन रद्द करना पड़ा।
लेखक ने दी चुनौती
मालदाहियार ने एक्स (पहले ट्विटर) पर लिखा, “मैं उन लोगों को चुनौती देता हूं जिन्होंने सेशन पर आपत्ति जताई, कि वे मेरी किताब से एक भी पन्ना दिखाएं जिसमें बाबर की तारीफ की गई हो।” उनका सेशन 10 जनवरी को होना था, जिसमें वे बाबर की वसीयत और उन्नीसवीं सदी के विवादित दावे पर चर्चा करने वाले थे।
मीडिया रिपोर्ट को बताया जिम्मेदार
लेखक का कहना है कि कुछ दक्षिणपंथी संगठन गलत रिपोर्ट के कारण गुमराह हुए। इस दौरान उनकी किताब की प्रतियां जलाने और लिट फेस्ट सेशन बाधित करने की धमकियां भी मिलीं। जिस मीडिया आउटलेट ने विवादित रिपोर्ट छापी, उसने बाद में उनका स्पष्टीकरण प्रकाशित नहीं किया।
मंत्री की आलोचना और सुरक्षा का हवाला
मध्य प्रदेश के संस्कृति मंत्री धर्मेंद्र सिंह लोधी ने मालदाहियार की किताब की आलोचना की थी। वीएचपी और बजरंग दल जैसे संगठनों की धमकियों और हंगामे की आशंका के चलते पुलिस ने आयोजकों को सेशन रद्द करने की सलाह दी। आयोजकों ने सुरक्षा का हवाला देते हुए लेखक का टॉक रद्द कर दिया और उन्हें प्राचीन भारतीय वास्तुकला पर व्याख्यान देने का विकल्प दिया।
लेखक का जवाब
मालदाहियार ने कहा कि उनकी किताब पांच साल के शोध और फारसी ग्रंथों के गहन अध्ययन पर आधारित है। उन्होंने किसी को भी चुनौती दी कि किताब में बाबर की तारीफ का एक भी पन्ना दिखाया जाए। लेखक ने बताया कि आलोचक उन्हें ‘एंटी-बाबर’ भी कह रहे हैं, जबकि साहित्य अकादमी के एमपी निदेशक विकास दवे ने भी बिना पढ़े ही आलोचना में हिस्सा लिया।