
भोपाल। मध्य प्रदेश की राजनीति में बड़ा बदलाव सामने आया है। पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने तीसरी बार राज्यसभा न जाने का ऐलान कर दिया है। उनके इस निर्णय के बाद कांग्रेस के भीतर राज्यसभा की खाली होने वाली सीट के लिए नई बहस और शह-मात की तैयारी शुरू हो गई है।
दिग्विजय सिंह का कार्यकाल आगामी अप्रैल 2026 में समाप्त हो रहा है। संख्या बल के हिसाब से कांग्रेस के पास यह सीट सुरक्षित है, लेकिन दिग्गी के पीछे हटने के बाद प्रदेश के चार-पांच बड़े नेताओं के नाम चर्चाओं में हैं।
कौन-कौन दावेदार?
राज्यसभा के लिए सबसे पहले नाम पूर्व मुख्यमंत्री और कद्दावर नेता कमलनाथ का सामने है। कमलनाथ का मानना है कि वे केंद्र की राजनीति में लौट सकते हैं और उनका दावेदारी करना अन्य दावेदारों के सामने भारी पड़ सकता है।
इसके अलावा प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी, पूर्व केंद्रीय मंत्री और पूर्व PCC चीफ अरूण यादव और पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह के नाम भी रेस में चर्चा में हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि सभी नेता राज्यसभा की इस सीट के लिए दिल्ली दरबार में सक्रिय लॉबिंग कर सकते हैं।
दिग्विजय सिंह ने क्यों छोड़ी राज्यसभा?
विश्लेषकों के अनुसार दिग्विजय सिंह अब अपना पूरा समय प्रदेश के कार्यकर्ताओं और जनता के बीच बिताना चाहते हैं। 2028 के विधानसभा चुनाव को देखते हुए वे संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करने पर फोकस कर रहे हैं। उनका यह कदम यह संदेश देता है कि वे पूरी तरह मध्य प्रदेश के लिए समर्पित हैं।
मध्य प्रदेश में अन्य खाली सीटें
राज्यसभा में कुल 11 सीटों में से इस साल तीन खाली हो रही हैं। कांग्रेस की इस एक सीट के अलावा बीजेपी सांसद सुमेर सिंह सोलंकी और जॉर्ज कुरियन की सीट भी इस साल खाली हो रही हैं। लेकिन राजनीतिक हलकों की नजर इस बार खासतौर से कांग्रेस की उस एक सीट पर है, जहां दिग्गज नेताओं के बीच शह-मात का खेल शुरू होने वाला है।