Wednesday, January 14

PSLV-C62 मिशन विफल, लेकिन उम्मीद जिंदा: स्पेन का कैप्सूल ‘KID’ सुरक्षित, भेजता रहा उड़ान डेटा

नई दिल्ली।
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) का भरोसेमंद प्रक्षेपण यान PSLV-C62 सोमवार को तकनीकी खराबी के चलते अपने मिशन में सफल नहीं हो सका। इस असफलता के कारण रॉकेट में सवार भारत समेत कुल 15 उपग्रह अंतरिक्ष में स्थापित नहीं हो पाए। हालांकि, इसी मिशन से जुड़ी एक राहत भरी खबर ने वैज्ञानिकों और अंतरिक्ष जगत को उम्मीद दी है। मिशन में शामिल स्पेन की निजी कंपनी का छोटा स्पेस कैप्सूल ‘KID’ केवल सुरक्षित बच गया, बल्कि उसने करीब 190 सेकंड तक उड़ान से जुड़ा अहम डेटा पृथ्वी पर भेजा।

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तीसरे चरण में आई तकनीकी खराबी

PSLV-C62 ने सोमवार सुबह 10:18 बजे श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से उड़ान भरी थी। रॉकेट में भारत का उपग्रह अन्वेषा समेत कुल 15 सैटेलाइट और स्पेन का एक छोटा कैप्सूल शामिल था। उड़ान के दौरान तीसरे चरण में तकनीकी गड़बड़ी आ गई, जिसके कारण रॉकेट अपने निर्धारित उड़ान पथ से भटक गया और मिशन विफल हो गया।

असफलता के बीच बड़ी उपलब्धि

आमतौर पर रॉकेट फेल होने की स्थिति में पेलोड से किसी भी तरह का डेटा मिलना बेहद दुर्लभ होता है। ऐसे में ‘KID’ कैप्सूल का 190 सेकंड तक उड़ान डेटा भेजना एक बड़ी तकनीकी उपलब्धि मानी जा रही है। इस कैप्सूल को खास तौर पर पृथ्वी के वातावरण में दोबारा प्रवेश (री-एंट्री) के परीक्षण के लिए डिजाइन किया गया था। ISRO और संबंधित कंपनी के वैज्ञानिकों के लिए यह डेटा भविष्य के मिशनों में बेहद उपयोगी साबित हो सकता है।

इसरो प्रमुख का बयान

ISRO के अध्यक्ष वी. नारायणन ने बताया कि उड़ान के तीसरे चरण के दौरान जब स्ट्रैप-ऑन मोटर रॉकेट को निर्धारित ऊंचाई तक ले जाने के लिए आवश्यक थ्रस्ट प्रदान कर रहे थे, उसी समय तकनीकी समस्या उत्पन्न हुई। इसके बाद रॉकेट अपने तय मार्ग से भटक गया। उन्होंने कहा कि खराबी के कारणों की गहराई से जांच के लिए विस्तृत विश्लेषण शुरू कर दिया गया है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचा जा सके।

महत्वाकांक्षाओं को झटका, लेकिन सीख भी

PSLV-C62 मिशन को भारत की राष्ट्रीय जरूरतों और अंतरिक्ष क्षेत्र में उसकी वैश्विक महत्वाकांक्षाओं के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा था। मिशन की असफलता से जरूर झटका लगा है, लेकिन ‘KID’ कैप्सूल से मिले डेटा ने यह साबित कर दिया है कि विफलता के बीच भी नई सीख और संभावनाएं छिपी होती हैं। ISRO की यही सीख आने वाले अभियानों को और मजबूत बनाने में मदद करेगी।

 

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