
डॉक्टरों की सलाह है कि प्रदूषण से होने वाली सूखी खांसी को मामूली समझकर नजरअंदाज न किया जाए। समय पर डॉक्टर से परामर्श लेने से गंभीर समस्याओं से बचा जा सकता है और फेफड़ों को लंबे समय तक स्वस्थ रखा जा सकता है।
आज की हवा में PM 2.5 और PM 10 जैसे सूक्ष्म कण फेफड़ों में सीधे जमा हो जाते हैं। इससे फेफड़ों की अंदरूनी परत को नुकसान पहुंचता है और सूजन आ सकती है। बच्चों पर इसका असर और भी गंभीर होता है क्योंकि उनके फेफड़े पूरी तरह विकसित नहीं हुए होते।
कब दिखाएं डॉक्टर को
डॉ. राजेश भारद्वाज, कंसल्टेंट, मेडफर्स्ट ईएनटी सेंटर, के अनुसार:
- अगर सूखी खांसी 2–3 हफ्ते से ज्यादा बनी रहे, तो डॉक्टर को दिखाना जरूरी है।
- लंबे समय तक चलने वाली खांसी फेफड़ों में सूजन या किसी बीमारी की ओर इशारा कर सकती है।
चेतावनी के संकेत
- ज्यादा गाढ़ा कफ: खांसी के साथ बलगम ज्यादा या गाढ़ा आने लगे, तो बलगम की जांच जरूरी।
- सांस फूलना या घरघराहट: सांस लेने में तकलीफ या सीटी जैसी आवाज गंभीर स्थिति का संकेत। डॉक्टर इनहेलर या नेब्युलाइजेशन की सलाह दे सकते हैं।
- आवाज बैठना और गले में खराश: लैरिंक्स या श्वासनली में सूजन का संकेत। भाप लेना और नमी बनाए रखना फायदेमंद।
- नाक और साइनस पर असर: प्रदूषण के कारण राइनाइटिस या साइनुसाइटिस हो सकता है। पोस्ट-नेजल ड्रिप (नाक से बलगम का गले में गिरना) आम लक्षण है।
- बुखार या वजन घटना: अगर खांसी के साथ बुखार, भूख न लगना या वजन तेजी से कम हो, तो तुरंत डॉक्टर से मिलें और छाती का एक्स-रे कराएं।
बचाव के आसान उपाय
- दिनभर गुनगुने तरल पदार्थ पीएं, ताकि शरीर हाइड्रेट रहे और सांस की नलियों को आराम मिले।
- नियमित भाप लेना बलगम पतला करने में मदद करता है।
- नाक साफ रखने के लिए नेजल रिंस या जल नेति अपनाएं।
- ज्यादा प्रदूषण वाले इलाकों में मास्क पहनना फेफड़ों की सुरक्षा के लिए जरूरी है।
डिस्क्लेमर: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है। यह किसी भी दवा या इलाज का विकल्प नहीं हो सकता। ज्यादा जानकारी के लिए हमेशा अपने डॉक्टर से संपर्क करें।