
अगर पिता अपने बच्चों के लिए समय नहीं निकाल पाते हैं, तो यह मां के लिए बच्चों की परवरिश को चुनौतीपूर्ण बना देता है। पेरेंटिंग विशेषज्ञों के अनुसार, पिता की कम भागीदारी का असर सीधे मां और बच्चों दोनों पर पड़ता है। आइए जानते हैं एक्सपर्ट्स ने क्यों बताई यह मुश्किलें और इसके पीछे की तीन बड़ी वजहें।
- मां को निभानी पड़ती हैं दोहरी भूमिका
पेरेंटिंग कोच पुष्पा शर्मा के अनुसार, जब पिता भावनात्मक या व्यावहारिक रूप से मौजूद नहीं होते, तो मां को बच्चों की परवरिश में केयरटेकर और कंट्रोलर दोनों भूमिकाएं निभानी पड़ती हैं। इस दोहरे दबाव में मां की अथॉरिटी धीरे-धीरे कमजोर पड़ती है और बच्चे सीमा (limit) को पार करने लगते हैं। - बच्चों का व्यवहार बनता है चयनात्मक
टीनएजर बच्चे महसूस करते हैं कि मां जल्दी गिल्ट महसूस कर लेती हैं और डर के कारण पीछे हट जाती हैं। इसलिए बच्चे मां पर चिल्लाते हैं और पिताजी के सामने अलग व्यवहार करते हैं। इसका मतलब है कि उनका व्यवहार चयनात्मक (selective) हो जाता है। - फ्रस्ट्रेशन और चुनौती बढ़ जाती है
पिता की अनुपस्थिति में बच्चों के लिए बाउंड्री, स्ट्रक्चर और सुरक्षा का अनुभव कम हो जाता है। उनका फ्रस्ट्रेशन मां पर निकलता है। मां अक्सर हाइपर अलर्ट हो जाती हैं, हर चीज़ को लेकर ओवरथिंक करती हैं और फियर-बेस्ड पेरेंटिंग करने लगती हैं। ऐसे में टीनएजर अनसटेबल पैरेंट को बार-बार चुनौती देने लगते हैं।
पैरेंटिंग विशेषज्ञों का मानना है कि बच्चों की परवरिश एक टीमवर्क है और पिता की सक्रिय भागीदारी बच्चों के व्यवहार और मां की परवरिश को संतुलित रखती है।
डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई जानकारी एक्सपर्ट सलाह और सोशल मीडिया रील्स पर आधारित है। किसी भी पेरेंटिंग संबंधी जानकारी के लिए हमेशा विशेषज्ञ से संपर्क करें।