
मुंबई: बॉलीवुड सुपरस्टार राजेश खन्ना और शत्रुघ्न सिन्हा के बीच कभी गहरी दोस्ती थी, लेकिन राजनीति ने उनके रिश्ते में दरार डाल दी। शत्रुघ्न सिन्हा ने एक पुराने इंटरव्यू में खुलासा किया कि दिल्ली चुनाव में एक-दूसरे के खिलाफ खड़े होने के बाद उनकी दोस्ती टूट गई और राजेश खन्ना मरते दम तक इस बात को नहीं भुला पाए।
शत्रुघ्न ने बताया, “हम दिल्ली के चुनाव में आमने-सामने थे। राजेश खन्ना को यह स्वीकार करना मुश्किल लग रहा था कि चुनाव में उनका मुकाबला मुझसे है। मैंने उन्हें समझाया कि मैं आपके खिलाफ चुनाव नहीं लड़ रहा हूँ, यह राजनीतिक दल तय करता है। लेकिन उनका मन नहीं माना। एलके आडवाणी ने भारी अंतर से जीत हासिल की थी और राजेश खन्ना को भी गांधीनगर से लाखों वोटों का अंतर मिला। इस वजह से उन्हें दिल्ली की सीट छोड़नी पड़ी।”
चुनाव में मात्र 2,000–3,000 वोटों से हारने के बाद राजेश खन्ना की नाराजगी और बढ़ गई। बाद में जब सीट फिर से खाली हुई, तो उन्होंने दुबारा चुनाव लड़ा, लेकिन इस बार भी उनके सामने शत्रुघ्न खड़े थे।
दोस्ती पर भारी राजनीति
शत्रुघ्न सिन्हा ने याद किया, “हम लंबे समय तक बहुत अच्छे दोस्त रहे। चुनाव के बाद उन्होंने मुझसे बात करना बंद कर दी। मैंने सुलह करने की कई कोशिशें की और कुछ साल बाद माफी भी मांगी। लेकिन जब मैं अस्पताल में था और राजेश खन्ना भी अस्पताल में थे, तब भी उनसे मिलना नसीब नहीं हुआ। मेरी बेटी सोनाक्षी ने मुझे बताया कि राजेश खन्ना अंकल अब इस दुनिया में नहीं रहे। मैंने उन्हें पहले ही माफी मांग ली थी।”
सिनेमा में साथ
राजेश खन्ना और शत्रुघ्न सिन्हा ने कई फिल्मों में साथ काम किया, जिनमें मुकाबला (1979), दुश्मन दोस्त, नसीब (1981), दिल–ए–नादान (1982), मकसद (1984) और आज का एमएलए राम अवतार (1984) शामिल हैं। राजनीतिक मतभेदों के बावजूद, उनका फिल्मी सफर हिंदी सिनेमा के इतिहास में अनमोल पन्ना बनकर रहा।