Tuesday, January 13

‘भरोसे लायक नहीं हैं’—अमेरिकी राजदूत के बयान पर टीएस सिंहदेव का तंज, शक्सगाम घाटी को लेकर सरकार पर साधा निशाना

 

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छत्तीसगढ़ कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व उपमुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव ने शक्सगाम घाटी विवाद, भारत–चीन सीमा स्थिति और भारत–अमेरिका संबंधों को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि यदि भारतीय भूमि पर किसी अन्य देश द्वारा निर्माण या गतिविधि की खबरें सही हैं, तो यह सीधे तौर पर सरकार की गंभीर विफलता को दर्शाता है।

 

शक्सगाम घाटी को लेकर बढ़ते भारत–चीन तनाव पर प्रतिक्रिया देते हुए सिंहदेव ने सवाल उठाया कि किसी दूसरे देश का व्यक्ति भारत की सीमा में कैसे प्रवेश कर सकता है और वहां काम कैसे कर सकता है। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में ऐसी संवेदनशील जानकारी को देश से छिपाना बेहद गंभीर खामी है और सरकार को इस पर स्पष्ट जवाब देना चाहिए।

 

ट्रंप के टैरिफ पर तीखी प्रतिक्रिया

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान पर लगाए गए टैरिफ को लेकर टीएस सिंहदेव ने कहा कि अब हालात ऐसे हो गए हैं कि ट्रंप खुलेआम दुनिया पर टैरिफ थोप रहे हैं। किसी देश के राष्ट्राध्यक्ष का इस तरह धौंस जमाने वाला रवैया अपनाना न केवल अनुचित, बल्कि अनैतिक और अस्वीकार्य है।

 

भारत–अमेरिका रिश्तों पर सवाल

भारत में नए अमेरिकी राजदूत के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए सिंहदेव ने कहा,

“राष्ट्रपति कुछ और कहते हैं, राजदूत कुछ और। दोनों में से कोई भी पूरी तरह भरोसेमंद नहीं लगता। यह किस तरह का सिस्टम है? यह भरोसे से परे है।”

उन्होंने कहा कि ऐसे विरोधाभासी बयानों से भारत–अमेरिका संबंधों में स्पष्टता और विश्वसनीयता पर सवाल खड़े होते हैं।

 

अयोध्या राम मंदिर पर भी टिप्पणी

अयोध्या राम मंदिर से जुड़े मुद्दे पर बोलते हुए टीएस सिंहदेव ने कहा कि वे स्वयं भी वहां नहीं गए हैं। उन्होंने अफसोस जताया कि इस पवित्र स्थल को अब दिखावे और तमाशे का रूप दे दिया गया है।

उन्होंने करीब 31 साल पुरानी एक राष्ट्रीय अखबार की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि पहले राम जन्मभूमि क्षेत्र में 60–70 अलग-अलग चबूतरे थे, जो श्रद्धा के केंद्र थे और जहां लोग भगवान राम के जन्म से जुड़ी आस्था को समझते थे। बाद में ये सभी स्थल विवादों में उलझ गए और मूल आस्था पीछे छूट गई।

 

टीएस सिंहदेव ने कहा कि आस्था को राजनीतिक या प्रचार का माध्यम नहीं बनाया जाना चाहिए, क्योंकि इससे श्रद्धा का वास्तविक स्वरूप कमजोर पड़ता है।

 

कुल मिलाकर, टीएस सिंहदेव के बयानों ने एक बार फिर सीमा सुरक्षा, विदेश नीति और धार्मिक आस्था जैसे संवेदनशील मुद्दों पर केंद्र सरकार की भूमिका को सवालों के घेरे में ला दिया है।

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